क्यों इतना अहम है UPEIDA, जिसे नंदी से हटाकर खुद CM ने अपने अधीन कर लिया?
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसले में UPEIDA को औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के अधिकार क्षेत्र से हटाकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन कर दिया है. UPEIDA प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों में शामिल है, जिसके जिम्मे पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाएं हैं. आइए जानते हैं कि इस फैसले के क्या मायने हैं?
उत्तर प्रदेश में एक प्रशासनिक आदेश ने बड़ी चर्चा छेड़ दी है. योगी सरकार ने राज्य के सबसे ताकतवर इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों में शामिल UPEIDA यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण को औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के अधिकार क्षेत्र से हटाकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन कर दिया है. सवाल यह है कि आखिर UPEIDA इतना महत्वपूर्ण क्यों है और इस बदलाव के क्या राजनीतिक और प्रशासनिक मायने हैं?
दरअसल, यूपी में पिछले आठ वर्षों के दौरान जितने बड़े एक्सप्रेसवे बने या बन रहे हैं, उनमें अधिकांश परियोजनाओं की जिम्मेदारी UPEIDA के पास रही है. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और कई अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं ने UPEIDA को राज्य का सबसे प्रभावशाली इंफ्रास्ट्रक्चर प्राधिकरण बना दिया है. यही वजह है कि इसे केवल सड़क निर्माण एजेंसी नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का इंजन माना जाता है.
UPEIDA के जिम्मे है कई अहम प्रोजेक्ट
मौजूदा समय में UPEIDA तीन बड़े लिंक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. इनमें चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं. इसके अलावा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे पांच नए प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित हैं. यानी आने वाले वर्षों में प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा UPEIDA के माध्यम से विकसित होना है.
UPEIDA की भूमिका सिर्फ एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं है. यह डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और एक्सप्रेसवे के किनारे निवेश आधारित विकास योजनाओं को भी आगे बढ़ाता है. राज्य में हजारों करोड़ रुपये के निवेश और भूमि विकास परियोजनाएं इसी संस्था के माध्यम से संचालित होती हैं. यही कारण है कि इसे सरकार का सबसे हाई-प्रोफाइल और हाई-बजट प्राधिकरण माना जाता है.
वर्तमान में संचालित प्रमुख एक्सप्रेसवे-
- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (लखनऊ से गाजीपुर)
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (चित्रकूट से इटावा)
- गंगा एक्सप्रेसवे (मेरठ से प्रयागराज)
- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
निर्माणाधीन/प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे-
- बलिया लिंक एक्सप्रेसवे
- चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे
- आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे
- फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे
- जेवर लिंक एक्सप्रेसवे
- झांसी लिंक एक्सप्रेसवे
- मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे
- विंध्य एक्सप्रेसवे
- विंध्य-पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
डिफेंस कॉरिडोर- UPEIDA के पास प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में शामिल उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की जिम्मेदारी भी है. इसके छह नोड हैं: लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट
इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट–
- एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक टाउनशिप
- इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर
- मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क
- वेयरहाउसिंग हब
- निवेशकों के लिए इंडस्ट्रियल पार्क
एक्सप्रेसवे रखरखाव–
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का संचालन और रखरखाव
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का रखरखाव
नए एक्सप्रेसवे की टोलिंग और मैनेजमेंट व्यवस्था
क्यों महत्वपूर्ण है UPEIDA?
हजारों करोड़ रुपये का वार्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर बजट
प्रदेश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क की जिम्मेदारी
डिफेंस कॉरिडोर जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट
एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगिक निवेश और भूमि विकास
यूपी को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने की रणनीति का प्रमुख आधार
अवस्थापना के अधीन आया UPEIDA
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विभागीय कार्यों के बंटवारे और पत्रावलियों के अनुमोदन में भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए यह बदलाव किया गया है. अब UPEIDA सीधे मुख्यमंत्री के अधीन अवस्थापना विकास विभाग के जरिए संचालित होगा. इसका मतलब है कि एक्सप्रेसवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जुड़े अहम फैसलों पर मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी रहेगी.
हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि UPEIDA को लंबे समय से सरकार के सबसे प्रभावशाली विभागों में गिना जाता रहा है. सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में मंत्री नंदी कई परियोजनाओं और विभागीय कार्यों को लेकर अधिकारियों से जवाब-तलब भी कर चुके थे. ऐसे में इस फैसले को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि सत्ता के केंद्रीकरण और बड़े प्रोजेक्ट्स पर मुख्यमंत्री की प्रत्यक्ष निगरानी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
