औरैया की बालूशाही का हर कोई फैन, त्योहारों में खरीदने के लिए करनी पड़ती है एडवांस बुकिंग

औरैया की बालूशाही सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि जिले की संस्कृति और परंपरा की पहचान है.दूर-दूर तक इसकी डिमांड है. त्योहारों पर यहां की बालूशाही खरीदने के लिए इतनी भीड़ उमड़ती है कि एडवांस बुकिंग कराने तक की नौबत आ जाती है.

जिस तरह कानपुर के ठग्गू के लड्डू और आगरा का पेठा मशहूर है. उसी तरह औरैया जनपद की बालूशाही की अपनी अलग पहचान है. इसकी मिठास औरेया से निकलकर लखनऊ और दिल्ली में रहने वाले लोगों को भी अपना मुरीद बना चुकी है.
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औरैया लखनऊ और दिल्ली के बीच नेशनल हाईवे किनारे के किनारे स्थिल जिला है. कहा जाता है कि यहां से अगर कोई बड़े नेताओं या सेलिब्रिटीज से मिलने जाता है तो औरेया की मिठाई जरूर लेकर जाता है. इसके अलावा बहुत से लोग स्पेशल डिमांड पर भी इस लड्डू को उधर से आने वाले लोगों के जरिए मंगाते हैं.
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बालूशाही बनाने वाले रामकुमार हलवाई बताते हैं कि इसे बनाने के लिए सभी उत्पादों को वजन मशीन से तौल कर बराबर बराबर मात्रा में रखा जाता है. इसमें थोड़ा कमी या ज्यादा स्वाद को बिगाड़ सकता है. इस मिठाई को 30 मिनट से 45 मिनट तक देसी घी में तलने के बाद शक्कर की बनाई हुई चाशनी में मानक के अनुसार डुबोने के बाद निकाला जाता है. फिर स्वाद में यह लाजवाब लगता है.
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यहां की बालूशाही को बनाने में एक अलग सी कलाकारी अपनाई जाती है. बालूशाही अंदर तक पूरी तरह सीकी हुई होती है. बालूशाही को अच्छे से तला जाता है. इसलिए इसका कलर भी अलग होता है. खाने में यह बिलकुल खुश्क होता है. ऐसी बालूशाही पूरे देश में कहीं नहीं मिलेगी.
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त्योहारी सीजन में शहर की कई नामी मिठाई दुकानों पर बालूशाही की डिमांड बढ़ जाती है. मिठाइयों के लिए उस वक्त एडवांस ऑर्डर बुकिंग करनी पड़ती है. दीपावली के हफ्ते भर पहले से ही बालूशाही के ऑर्डर आने लगते हैं. औरैया की बालूशाही अब स्थानीय ब्रांड से राष्ट्रीय स्वाद बन चुकी है.
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इस मिठाई को बेचने वाले दुकानदार सचिन के अनुसार यह मिठाई औरैया जनपद के साथ ही साथ आसपास के जनपदों जैसे जालौन जनपद , कन्नौज जनपद , कानपुर देहात जनपद , कानपुर नगर समेत कई जिलों तक रोजाना खरीद कर ले जाई जाती है.
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स्थानीय लोगों के मुताबिक जब भी कोई व्यक्ति औरैया जनपद से बाहर कहीं रिश्तेदारी में जाता है तो उससे यह मिठाई फोन करके स्पेशल मंगवाई जाती है. अब यह बालूशाही सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि जिले की संस्कृति और परंपरा की पहचान बन गई है.
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