जमीयत उलमा-ए-हिंद ने बाबरी मस्जिद फैसले और पूजा स्थल अधिनियम पर एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट का बाबरी मस्जिद फैसला यह दर्शाता है कि बहुसंख्यकवादी विचारधारा ने कानूनी वैधता में गहरी पैठ बना ली है. साथ ही यह पूजा स्थल अधिनियम को मजबूत करने की सिफारिश करती है.