खिदमत सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान मलिक ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य किसी पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थाओं और निकाह पढ़ाने वाले इमामों को अनावश्यक कानूनी विवादों से सुरक्षित रखना है. उन्होंने कहा कि निकाह एक पवित्र धार्मिक अनुबंध है और इसमें पारदर्शिता तथा सत्यता बेहद आवश्यक है.