अखिलेश यादव ने बीजेपी के महिला आरक्षण बिल नैरेटिव को तोड़ने की तैयारी में है. सपा पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को आगे लाकर यह संदेश देगी कि बिल अधूरा है. अखिलेश का तर्क है कि बिना जातीय जनगणना यह बिल केवल सामान्य वर्ग के लिए है, और बीजेपी परिसीमन से सत्ता बचाना चाहती है.