गोरखपुर थप्पड़ कांड ने जातीय गोलबंदी का रूप ले लिया है. संजय निषाद के 'हाथ काटने' वाले बयान पर क्षत्रिय समाज आक्रोशित है, जिसने पलटवार करते हुए उन्हें मछली काटने तक सीमित रहने को कहा. अंशुमान सिंह के समर्थन में क्षत्रियों ने फर्जी मुकदमे वापसी की मांग की है.