मुरादाबाद में स्थित है 151 साल पुराना चर्च, शिल्पकला और विरासत का अनोखा संगम- Photos

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में ब्रिटिश कालीन एक प्राचीन चर्च स्थित है. यह अपने शिल्पकला, गौरवशाली विरासत और आस्था का अनोखा संगम है. 151 साल पुराना यह चर्च बीच में लगभग बीस साल तक बंद रहा था. साल 2020 में जीर्णोद्धार के बाद इसने नया जीवन प्राप्त किया.

मुरादाबाद का ओल्ड मेथोडिस्ट चर्च 151 वर्षों से शहर की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है. ब्रिटिश काल में 1874 में निर्मित यह आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. लगभग बीस साल तक बंद रहने के बाद, 1992 में इसे फिर से सक्रिय किया गया.
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2020 में जीर्णोद्धार के बाद इसने नया जीवन प्राप्त किया. आज यह चर्च अपनी समृद्ध परंपरा और ऐतिहासिक महत्व के साथ प्रगति कर रहा है. इस चर्च में ई.डब्ल्यू. पारकर द्वारा 5 जुलाई 1875 को प्रथम प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी.
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समय के साथ यह चर्च ‘मैथोडिस्ट चर्च ऑफ इंडिया’ (MCI) का अभिन्न हिस्सा बना. आज यह चर्च अपनी भव्यता और अटूट परंपरा के साथ जन-मानस के लिए खुला है. इस ऐतिहासिक चर्च का सफर बदलाव और संकल्प की अनूठी कहानी है.
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​मुख्य पादरी डेविड जेम्स के अनुसार, पीलीकोठी चर्च के साथ विलय की चर्चाओं के चलते यह स्थान लगभग बीस वर्षों तक बंद रहा, लेकिन 1992 में पादरी ब्रजेश मैंसल के प्रयासों से इसे एक बार फिर से क्रियाशील किया गया था.
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पादरी मैंसल ने 2014 तक यहां अपनी निस्वार्थ सेवाएं दीं, जिसके बाद पादरी डेनियल मसीह और हिमांशु मनी ने इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाया. 2020 में, जब समय की मार से चर्च का ढांचा जर्जर होने लगा, तब जीर्णोद्धार कराकर इसे नया जीवन दिया गया.
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वर्तमान में मुख्य पादरी डेविड जेम्स और सहायक राजू चरन के नेतृत्व में यह चर्च अपनी 150वीं वर्षगांठ का गौरव मनाते हुए निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है. क्रिसमस और गुड फ्राइडे के दिन यह चर्च टूरिस्टों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है.
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