किसानों की समस्या सुन रही बागपत की DM, तभी पहुंच गया ‘मटरू’, रिएक्शन जीत लेगा दिल

बागपत में मटरू नाम का एक लंगूर कुर्सियों के बीच से होता हुआ टेबल तक पहुंच गया और आराम से बैठ गया. मानों वह भी बैठक का हिस्सा हो. कुछ लोग घबरा गए, तो कुछ अपनी हंसी नहीं रोक पाए. इस दौरान वहां मौजूद जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बेहद शांत और समझदारी भरा रवैया दिखाया. उनके रिएक्शन ने लोगों का दिल जीत लिया.

बागपत में आयोजित किसान दिवस की बैठक उस समय अचानक चर्चा का विषय बन गई, जब एक शरारती लंगूर, बिना बुलाए सभा में पहुंच गया. बैठक में जिले के अधिकारी, किसान और जनप्रतिनिधि मौजूद थे. माहौल पूरी तरह गंभीर था, लेकिन ‘मटरू’ की एंट्री ने सब कुछ बदल दिया. माहौल खुशगवार हो गया.
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लंगूर सीधे कुर्सियों के बीच से होता हुआ टेबल तक पहुंच गया और आराम से बैठ गया. मानों वह भी बैठक का हिस्सा हो. कुछ लोग घबरा गए, तो कुछ अपनी हंसी नहीं रोक पाए. इस दौरान वहां मौजूद जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बेहद शांत और समझदारी भरा रवैया दिखाया. उन्होंने बिना किसी हड़बड़ी के अपनी कुर्सी छोड़ दी और लंगूर को बैठने का इशारा किया.
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डीएम साहिबा ने कहा कि- बैठ इधर बैठ. डीएम के इस व्यवहार से वहां मौजूद लोगों को भी हिम्मत मिली और माहौल सामान्य बना रहा. मटरू लंगूर कुछ देर तक टेबल पर रखे कागजों और आसपास की चीजों को देखता रहा. ऐसा लग रहा था वह भी किसानों की समस्याएं सुन रहा हो. इस अनोखे दृश्य को वहां मौजूद कई लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया.
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देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. लोग इस घटना को मजेदार अंदाज में शेयर कर रहे हैं और डीएम अस्मिता लाल की तारीफ करते नहीं थक रहे. बागपत की यह किसान बैठक अब मटरू लंगूर की वजह से लंबे समय तक याद रखी जाएगी. बता दें कि मटरू लंगूर अक्सर कलेक्ट्रेट परिसर में नजर आता रहता है.
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इससे पहले दो महीने पहले जब किसान जब अपनी समस्याएं लेकर जिलाधिकारी आवास पहुंचे थे. तब उनकी समस्याएं सुनते हुए डीएम की नजर लंगूर पर पड़ी तो वो जमीन पर बैठकर उसके साथ खेलने लगीं. लंगूर ने डीएम के हाथ को पकड़ लिया. इस पर उन्होंने कहा- नो मटरू. किसानों ने कहा- मैडम नो कहने से ये नहीं मानेगा. ये सुनकर डीएम भी हंस पड़ीं थी.
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बता दें कि दिल्ली निवासी अस्मिता लाल 2015 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. अस्मिता लाल को बागपत की जिलाधिकारी के तौर पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का कार्यभार पहली बार सौंपा गया. इससे पहले उन्हें गाजियाबाद में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के पद पर नियुक्ति दी गई थी.
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