अलकनंदा संग सरस्वती-घाघरा पर भी मड़राया संकट, दहशत में लोग; जर्जर हाल में गाजियाबाद के आवासीय टॉवर्स… Photos
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में देश की प्रमुख नदियों के नाम पर बसाए गए आवासीय टॉवर जर्जर हो चुके हैं. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अनदेखी की वजह से इन सभी टॉवर्स में हादसों की आशंका प्रबल हो गई है. हालात को देखते हुए स्थानीय लोगों ने जीडीए से तत्काल इनकी मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था करने की मांग की है. यह सभी टॉवर गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 में बने हैं.
पहले केवल अलकनंदा टॉवर को लेकर शिकायतें आती थीं. इसमें सीलन, प्लास्टर झड़ने की शिकायतें कामन होती थी. लेकिन अब स्ट्रक्चर को देखकर आशंका जताई जा रही है कि इस टॉवर में कभी भी हादसे हो सकते हैं. इसी के साथ यहां सरस्वती, घाघरा और शारदा समेत कई अन्य टावरों से भी इसी तरह की शिकायतें आने लगी हैं.
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सरस्वती टॉवर में तो दरारें आने की भी शिकायत है. इसी प्रकार घाघरा और शारदा आदि टॉवर्स में संरचनात्मक कमजोरी के आरोप हैं. ऐसे में इन टॉवर्स में रहे सैकड़ों परिवार दहशत में आ गए हैं. उनका कहना है कि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
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वैशाली सेक्टर-4 में जीडीए ने अलकनंदा, मंदाकिनी, सरस्वती, घाघरा और शारदा टॉवर बनाए हैं. इन टॉवरों को साल 1965 से 1989 के बीच बनाया गया था. रखरखाव के अभाव में महज 45-50 सालों के अंदर ही ये टॉवर जर्जर हो चले हैं. इनमें सबसे खराब हालत बेसमेंट की है. इससे टॉवर के ढांचे पर भी खतरा मंडराने लगा है.
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में देश की प्रमुख नदियों के नाम पर बसाए गए आवासीय टॉवर जर्जर हो चुके हैं. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अनदेखी की वजह से इन सभी टॉवर्स में हादसों की आशंका प्रबल हो गई है. हालात को देखते हुए स्थानीय लोगों ने जीडीए से तत्काल इनकी मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था करने की मांग की है. यह सभी टॉवर गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 में बने हैं.
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आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों का कहना है कि टावरों की हालत को देखते हुए इन्हें तुरंत खाली कराया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि अब तक केवल अलकनंदा टावर का ही निरीक्षण किया गया, जबकि बाकी टावरों की स्थिति भी उतनी ही खराब है. जीडीए के चीफ इंजीनियर ने अलकनंदा समेत अन्य टॉवर्स के निरीक्षण के बाद मान लिया है कि ये सभी जर्जर हो चुके हैं.हालांकि अभी तक उन्होंने इन टॉवर्स में रह रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. उधर, इन टॉवर्स के रहवासियों ने खतरे की आशंका जताते हुए इन्हें खाली कराने की मांग की है.