7 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद अब यूट्यूबर सलीम वास्तिक को होश आ गया है. उन्होंने डॉक्टर्स की बात पर रिएक्ट किया है. हालांकि, हालांकि, डॉक्टर्स ने ये कह रहे हैं कि सलीम आगे बोल सकेंगे कि नहीं ये अब तक क्लियर नहीं है.
गोरखपुर में MBBS छात्र आकाश पांडे को अपनी फॉर्च्यूनर से कुचलने वाला गोल्डन साहनी शहर का छुटभैया नेता है. खुद को यूपी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का करीबी होने का दावा करता है. साथ ही मंत्री जी को अपना फूफा भी बताता है. इसके अलावा वह लोगों को अपना परिचय भावी ब्लॉक प्रमुख के तौर पर देता था.
सहारनपुर में नौगवां गांव में एक युवक ने गुस्से में समय से पहले होलिका दहन स्थल पर आग लगाने का प्रयास किया. फिलहाल, युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस पूछताछ में युवक ने बताया कि होली लगाने के लिए कोई उसका छप्पर उठाकर लाया गया था. इसी बात को लेकर वह आक्रोशित था. ऐसे में उसने गुस्से में आकर समय से पहले होलिका में आग लगाने का प्रयास कर दिया.
सहारनपुर में रेप के एक आरोपी ने सजा से बचने और खुद को मुर्दा दिखाने के लिए अपने ही दोस्त की हत्या कर उसकी लाश कार के साथ जला दी. फिलहाल, पुलिस ने उसे, उसके भाई और अन्य दो साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
25 फरवरी को 50 से ज्यादा आयकर अधिकारी भारी पुलिस फोर्स के साथ सुबह 7 बजे बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के आवास पर पहुंच गए. इसी वक्त उमाशंकर सिंह के बलिया और सोनभद्र के ठिकानों पर भी इनकम टैक्स के अधिकारियों ने रेड मारी. फिलहाल उमाशंकर सिंह के घर पर इनकम टैक्स की रेड खत्म हो गई है. लेकिन उनके आवास पर अब भी आयकर अधिकारी मौजूद हैं.
मधुबन-बापूधाम अंडरपास का तकरीबन 85 फीसदी कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस अंडरपास के पूरा होने से गाजियाबाद के गोविंदपुरम और स्वर्णजयंतीपुरम, कर्पूरीपुरम और शास्त्रीनगर, डासना, मसूरी और सदरपुर गांव, बालाजी एन्क्लेव और आसपास की पॉश कॉलोनियां के लोगों को मेरठ-दिल्ली रोड पर आने के लिए 14 किलोमीटर का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा.
ग्रेटर नोएडा में 24 फरवरी को नितिन नागर हत्याकांड की कड़ी डेढ़ साल पहले हुए एक मर्डर से जुड़ी हुई है. नितिन की हत्या से जुड़ी जो कहानी सामने आ रही है वह फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. फिलहाल, पुलिस ने इस मामले एक हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है.
मायावती ने जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को प्रभारी बनाया है. चुनाव तिथियों से पहले घोषित प्रभारियों को ही बसपा प्रत्याशी बनाती है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती ने ब्राह्मण चेहरे को पहला टिकट देकर बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला है.