देश में मुकदमा, विदेश में गवाही; कानपुर की कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुआ सुलहनामा

कानपुर कोर्ट में एक अनूठा मामला सामने आया. इसमें सऊदी अरब में रह रहे व्यक्ति ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए गवाही दी और आपसी सुलहनामा हुआ. यह संभवतः कानपुर का पहला ऐसा मामला है, जिसमें विदेश से न्यायिक प्रक्रिया पूरी की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट की अनुमति से हुई इस ऑनलाइन गवाही ने लंबित मुकदमों के निस्तारण का नया रास्ता दिखाया है.

कानपुर कोर्ट Image Credit:

देश भर की अदालतों में तरह तरह के मुकदमे होते हैं. सालों सुनवाई चलती है, लेकिन आपसी सहमति ना बन पाने की वजह से कोई फैसला नहीं हो पाता. कभी कभार ऐसे भी मामले आते हैं, जिसमें एक पक्ष विदेश में बैठकर भी सभी विधिक औपचारिकताओं का पालन करते हुए मामलों का निस्तारण करा लेता है. ऐसा ही एक मामला कानपुर की अदालत में भी आया है. माना जा रहा है कि इस तरह का शायद यह पहला मामला है, जिसमें सऊदी अरब से बैठे व्यक्ति ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से गवाही दी और मामले में समझौता हो गया.

जानकारी के मुताबिक कानपुर के कर्नलगंज में रहने वाली एक मुस्लिम महिला का निकाह अनस मोहम्मद के साथ 4 दिसंबर, 2023 को हुआ था. इस निकाह के शुरूआत में तो सब ठीक रहा, लेकिन एक साल बाद ही इनके बीच झगड़े शुरू हो गए. ऐसे में महिला ने अपने शौहर के खिलाफ दहेज, मारपीट के साथ मुस्लिम महिला अधिनियम के तहत थाना बेकनगंज में मुकदमा दर्ज करा दिया. मामले ने भी मामले की जांच की और आरोपी शौहर के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में फाइल कर दी.

हाईकोर्ट ने दी अनुमति

इस बीच शौहर-बीवी के बीच समझौता हो गया. दोनों मुकदमा खत्म करने को राजी हो गए और समझौते की फाइल कोर्ट में लग गई. इसी बीच अनस को किसी काम से सऊदी अरब जाना पड़ा. इसी बीच कोर्ट ने अनस को गवाही के लिए तलब कर लिया. ऐसे में अनस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अर्जी लगाई और 18 सितंबर, 2025 को वीडियो कांफ्रेंसिंग से हाजिर होने की अनुमति हासिल कर ली. फिर हाईकोर्ट के ही आदेश पर कानपुर के एसीजे जेडी 2 शुभम द्विवेदी की कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हाजिर हो गया.

ऐसे हुई आनलाइन गवाही

इस गवाही से पहले दोनों देशों के बीच तीन ईमेल का आदान प्रदान हुआ. दोनों देशों के समय में तकरीबन तीन घंटे का फर्क था. ऐसे में यह गवाही भारतीय समयानुसार दोपहर 2.30 बजे रखी गई. रियाद स्थित इंडियन एंबेसी में बैठकर पति अनस ने अपने को तस्दीक कराया. इसके बाद बाकी औपचारिकताओं को पूरा किया गया. दरअसल, नए कानून बीएनएस के आने के बाद ऑनलाइन गवाही का प्रावधान हो गया है. चूंकि यह मामला उससे पहले का है, इसलिए इलाहाबाद हाई कोर्ट से अनुमति से ऑनलाइन गवाही करानी पड़ी है.