यूपी में दिल्ली मॉडल पर बनेंगे डिटेंशन सेंटर, रोजाना गृह विभाग को देनी होगी जानकारी
उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया गया है. सीएम योगी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को घुसपैठियों की पहचान करने के निर्देश दिए थे. साथ ही हर जिलों में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने को कहा था. वहीं, अब यूपी में दिल्ली मॉडल की तर्ज पर डिटेंशन सेंटर बनाए जा रहे हैं. इनमें अवैध बांग्लादेशी, रोहिंग्यों के साथ अफ्रीकी घुसपैठियों को भी रखा जाएगा.
यूपी सरकार अवैध घुसपैठियों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है. सीएम योगी के निर्देश पर दिल्ली मॉडल की तर्ज पर डिटेंशन सेंटर बनाए जा रहे हैं. इनमें बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अफ्रीकी नागरिकों को रखा जाएगा, जब तक उनकी डिपोर्टेशन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती. पहले चरण में खाली सरकारी भवनों को डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा.
जिलाधिकारियों और एसएसपी को निर्देश हैं कि जिले में खाली पड़ी सरकारी इमारतें, सामुदायिक भवन, पुलिस लाइन परिसर, थाने या अन्य सुरक्षित जगह चिन्हित की जाए. इन स्थानों पर दिल्ली मॉडल पर कड़ी सुरक्षा के साथ डिटेंशन सेंटर चलाए जाएंगे. पकड़े गए घुसपैठियों को खाना, पानी, चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएगी, लेकिन उनकी निगरानी 24×7 रहेगी.
घुसपैठिए की जानकारी रोजाना देनी होगी
दिल्ली में इस समय 18 डिटेंशन सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां करीब 1500 विदेशी नागरिक बंद हैं. इनमें ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं, जिन्होंने फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बनवा रखे हैं. कुछ अफ्रीकी नागरिक भी हैं जो ड्रग तस्करी और साइबर क्राइम में लिप्त पाए गए हैं. दिल्ली मॉडल को ही यूपी में लागू किया जा रहा है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को डिटेंशन सेंटर बनाने और संचालन की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भेजी है. इसके तहत पकड़े गए हर घुसपैठिए की जानकारी रोजाना प्रदेश के गृह विभाग को देनी होगी. डिपोर्टेशन की अंतिम प्रक्रिया FRRO के जरिए होगी. बांग्लादेशी घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल-असम बॉर्डर से बीएसएफ की मदद से वापस भेजा जाएगा.
व्यापक स्क्रीनिंग और डिपोर्टेशन की तैयारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में नाइजीरिया, घाना, आइवरी कोस्ट आदि अफ्रीकी देशों के सैकड़ों नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं. ये लोग ड्रग्स तस्करी, ऑनलाइन ठगी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे संगीन अपराधों में संलिप्त हैं. अब इनकी भी व्यापक स्क्रीनिंग और डिपोर्टेशन की तैयारी है.
पिछले कुछ सालो में यूपी के सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. वहीं एनसीआर में अफ्रीकी नागरिकों का अवैध ठिकाना बन चुका है. अधिकारियों का कहना है कि ये लोग स्थानीय स्तर पर अपराध और आतंकी गतिविधियों के लिए भी खतरा बन रहे थे, इसलिए अब इन्हें चिन्हित कर वापस भेजने का अभियान शुरू हो गया है.
