मुरादाबाद: डबल M.A किया, सरकारी नौकरी को त्यागा… मिट्टी के लाल रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री

बिलारी के किसान वैज्ञानिक रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री से नवाजा गया है. उन्हें कृषि में अद्वितीय योगदान और बीज संरक्षण के लिए यह सम्मान मिला है. रघुपत सिंह ने डबल एम.ए. किया, सरकारी नौकरी त्यागकर कृषि को अपना जीवन समर्पित किया था. उनकी यह तपस्या अब राष्ट्रीय सम्मान पा रही है.

मुरादाबाद के किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री Image Credit:

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के बिलारी तहसील गांव के एक साधारण किसान रघुपत सिंह ने यह साबित कर दिया कि यदि जुनून सच्चा हो, तो खेती केवल आजीविका नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम बन जाती है. केंद्र सरकार के द्वारा स्वर्गीय रघुपत सिंह को कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत ‘पद्म श्री’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है, यह सम्मान उस तपस्या का प्रतिफल है, जो रघुपत सिंह 1980 से लगातार खेतों की मिट्टी से जुड़कर की थी.

रघुपत सिंह, डबल एम.ए. उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद, सरकारी नौकरी की चकाचौंध को ठुकराकर बीजों के संरक्षण और शोध को अपना जीवन समर्पित कर दिया था. रघुपत सिंह का 1 जुलाई 2025 को निधन हो गया था, लेकिन उनकी विरासत आज भी उनके खेतों और बीजों के रूप में जीवित है.

कृषि वैज्ञानिक की तरह लुप्त हो चुकी सब्जियों की खेती

रघुपत सिंह न केवल खेती की, बल्कि उन प्रजातियों को बचाया जो आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त होने की कगार पर थीं, अब उनकी इस मेहनत को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने जा रहा है, जिसे प्राप्त करने के लिए उनका पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है. उनका परिवार उनकी महान विरासत को आगे बढ़ा रहा है, जिससे वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं.

रघुपत सिंह के पुत्र सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि उनके पिता का मुख्य उद्देश्य लुप्त हो चुकी पारंपरिक सब्जियों और फसलों की प्रजातियों को फिर से मुख्यधारा में लाना था. वे केवल एक पारंपरिक किसान नहीं थे, बल्कि एक कृषि वैज्ञानिक की तरह बीजों का शोधन और नई प्रजातियों का विकास करते थे. उनके द्वारा तैयार किए गए बीजों का वितरण कई प्रमुख कृषि संस्थानों में किया जाता था.

गांव में खुशियों की लहर, बेटे उनके सम्मान को ग्रहण करेंगे

रघुपत सिंह साल 1980 से कृषि नवाचारों में जुटे थे और किसानों को प्रशिक्षण भी देते थे. उनकी इसी विशेषज्ञता के कारण उन्हें 10 राष्ट्रीय और 18 राज्य स्तरीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका था. पिता के निधन के बाद अब उनका परिवार उनकी इस महान विरासत को आगे बढ़ा रहा है. सुरेंद्र पाल और उनके तीनों भाई-बहन पूरी तरह कृषि और बीज शोधन के कार्य से जुड़े हुए हैं.

परिवार का कहना है कि पद्म श्री मिलने की सूचना से घर और गांव में खुशियों की लहर है. हालांकि, पिता की कमी महसूस हो रही है. इस सम्मान को उनके पुत्र सुरेंद्र पाल सिंह ग्रहण करेंगे. रघुपत सिंह ने यह सिद्ध कर दिया कि उच्च शिक्षा का सही उपयोग ग्रामीण विकास और कृषि की जड़ों को मजबूत करने में किया जा सकता है. उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है.