राजस्थान से सहारनपुर आई 32 साल की मैना हथिनी, फोटो खिंचवाते समय खुद देती है पोज!

राजस्थान के आमेर किले से आई मैना हथिनी सहारनपुर की रामलीला में सबका मन मोह रही है. अपनी शांत प्रकृति और तस्वीरें खिंचवाने के अंदाज के कारण मैना खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. जानिए इसकी दिलचस्प कहानी...

आमेर की मैना हथिनी सहारनपुर की रामलीला में Image Credit:

राजस्थान के आमेर किले में पर्यटकों को सवारी कराने वाली 32 साल की मैना हथिनी इन दिनों सहारनपुर में है. यह सहारनपुर की प्राचीन श्री रामलीला कमेटी के रामलीला भवन में पहली बार आई है. रामलीला की शोभायात्रा के दौरान जब मैना सज-धजकर शहर के बाजारों से गुजरती है, तो लोग उसे देखने के लिए ठहर जाते हैं.

मैना राजस्थान के आमेर आई मैना करीब 32 साल की है. इससे पहले भी मैना मेलों, शोभायात्राओं और कई बार राजपरिवारों के कार्यकमों का हिस्सा बन चुकी है. अपने शांत स्वभाव के कारण मैना लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. मैना के साथ जब कोई फोटो खिंचवाता है या कोई उसकी फोटो लेता है तो वो बिना किसी आदेश के खुद ही पोज देती है.

पहली बार आई मैना दशहरे तक यहां रहेगी

मैना की देखभाल करने वाले आरिफ खान पिछले डेढ़ साल से उसके साथ हैं. आरिफ ही मैना को ट्रक के जरिए राजस्थान से सहारनपुर लेकर आए हैं. मैना आमेर के किले में पर्यटकों को सवारी कराने के साथ राजपरिवारों के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती है. रामलीला सहारनपुर के रामलीला कार्यक्रम में पहली बार आई मैना दशहरे तक यहां रहेगी.

आरिफ खान मैना के खानपान और देखभाल का ध्यान रखते हैं. उनके मुताबिक, मैना शांत स्वभाव की है. शोभायात्रा के दौरान उसकी साज-सज्जा और सहज व्यवहार लोगों का ध्यान खींचता है. बाजार से गुजरते समय लोग उसे करीब से देखने के लिए उत्सुक नजर आते हैं. मैना जब चलती है तो वो खुद ही फोटो खिंचवाने के लिए अलग अलग पोज देती है.

हाथी गांव में 125 से अधिक हाथी पाले जाते हैं

मैना के खानपान में गन्ना, गुड़, रोटी और बाजरा शामिल हैं. हाथियों की देखभाल में उनके भोजन और दिनचर्या का खास ध्यान रखना पड़ता है. आरिफ खान मैना की जरूरतों को समझते हैं. उनका कहना कि वह कई गुस्सैल हाथी देखे हैं, लेकिन मैना जैसा शांत स्वभाव वाली हथिनी आज तक नहीं देखी. ऐसा रिश्ता बन गया जैसे मैना उन्हें अपने जन्म से जानती हो.

महावत आरिफ खान का कहना है की राजस्थान का आमेर हाथी गांव हाथियों के लिए जाना जाता है. आरिफ खान के मुताबिक, गांव में 125 से अधिक हाथी पाले जाते हैं और हाथियों की वजह से ही उनकी रोजी रोटी चलती है. पर्यटकों को सवारी कराने के अलावा हाथियों को मेलों, शोभायात्राओं और राजपरिवारों के कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है.

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