अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आए शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, बोले- सत्ता हर दिन नहीं रहेगी

प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच शुरू हुए विवाद पर अब शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है. शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि  प्रशासन को इस मसले पर माफी मांगनी चाहिए. ये शासन का अहंकार है. सत्ता हर दिन नहीं रहेगी.

स्वामी सदानंद सरस्वती और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच शुरू हुआ विवाद तूल पकड़ते ही जा रही है. प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा था कि वह अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है.

अविमुक्तेश्वरानंद ने ई-मेल के जरिए भेजा जवाब

अब अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 घंटे में मेला प्रशासन को 8 पेजों का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा है. उन्होंने नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि जिससे विमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका जाए. मामला कोर्ट में है. इसपर किसी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने और रोक लगाने का अधिकार नहीं है.स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्होंने नोटिस को वापस नहीं लिया तो कोर्ट में मानहानी का दावा करेंगे.

स्वामी सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया

अब इस मामले में द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है. उन्होंने कहा प्रशासन को इस मसले पर माफी मांगनी चाहिए. ब्राह्मण बटुतों को पुलिस ने चोटी पकड़कर घसीटा. शिखा के अंदर ब्रह्मरंध्र होता है, इसका अपमान नहीं किया जाता. उन्होंने आगे कहा कि ये शासन का अहंकार है. सत्ता हर दिन नहीं रहेगी. गंगा स्नान से रोकने वालों को गो-हत्या का पाप लगता है.

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि मौनी अमावस्या यानी 19 जनवरी के दिन को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा. इसके बाद पुलिस की अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई. इसके बाद शिष्यों से मारपीट और पालकी रोके जाने से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए. फिर प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाने पर नोटिस भेज दिया.