CM सामूहिक विवाह योजना में खेल: 37 फर्जी जोड़ों की कराई गई शादी, उपहारों में भी धांधली; 6 सचिव सस्पेंड
मुरादाबाद में CM सामूहिक विवाह योजना में घोटाले की खबर सामने आई थी. इसके जांच के आदेश दिए गए थे. अब रिपोर्ट में पाया गया है कि कुल 1600 जोड़ों में से 37 जोड़े पूरी तरह अपात्र हैं. इनमें से अकेले मूढापांडे ब्लॉक से 34 ऐसे जोड़े मिले जो योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते थे. प्रशासन ने अब इस मामले पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 सचिवों को सस्पेंड कर दिया है.
मुरादाबाद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों ने अपनी जेब भरने के चक्कर में अपात्रों को इस योजना का लाभ दिला दिया. साथ ही नवविवाहित जोड़ों को दिए जाने वाले उपहारों और भोजन की व्यवस्था में भी भारी धांधली की. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब कुंदरकी से भाजपा विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने मंत्री असीम अरुण और डीएम मुरादाबाद अनुज सिंह से इसकी लिखित शिकायत की थी.
बीजेपी विधायक के गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और डीएम मुरादाबाद अनुज सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी. जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. इसमें पाया गया कि कुल 1600 जोड़ों में से 37 जोड़े पूरी तरह अपात्र है, इनमें से अकेले मूढापांडे ब्लॉक से 34 ऐसे जोड़े मिले जो योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते थे.
जांच में यह भी पाया गया कि कई लाभार्थियों को तय मानक के अनुसार सामान और उपहार वितरित नहीं किए गए हैं. सरकारी धन के इस बंदरबांट और सत्यापन प्रक्रिया में बरती गई घोर लापरवाही को देखते हुए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के इस घोटाले ने सरकारी सिस्टम में बैठे उन चेहरों को बेनकाब कर दिया है, जिन्होंने गरीबों के लिए बनी कल्याणकारी योजना में सेंध लगाने का दुस्साहस किया.
जांच समिति की रिपोर्ट पर हुआ एक्शन
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर डीएम मुरादाबाद ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. मूढापांडे ब्लॉक में सबसे अधिक अनियमितताएं पाए जाने पर वहां तैनात छह ग्राम पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. इन सचिवों पर अपात्रों का गलत सत्यापन करने और चयन प्रक्रिया में धांधली करने का सीधा आरोप लगा है.
जांच में अतिरिक्त, खंड विकास अधिकारी (BDO) और एडीओ समाज कल्याण की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है. इसके चलते उनका वेतन रोक दिया गया है,सूत्रों की माने तो इन दोनों अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश देते हुए शासन को सख्त कार्यवाही के लिए पत्र भेजा गया है. डीपीआरओ और डीडीओ को अन्य ब्लॉकों की फाइलों को खंगालने के बी निर्देश दिए गए हैं ताकि घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सके.
लापरवाही करने वालों पर होगा बड़ा एक्शन
प्रशासनिक सख्ती के बीच अब अन्य ब्लॉकों और नगर क्षेत्रों के सत्यापनकर्ताओं पर भी जांच की तलवार लटक गई है. डीएम मुरादाबाद अनुज सिंह ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. जिन पात्र जोड़ों को अब तक उपहार सामग्री नहीं मिली थी, उन्हें सामान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, विधायक रामवीर सिंह ने इस कार्रवाई को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों को सजा मिलना जरूरी है.
