गणतंत्र दिवस पर विश्वनाथ मंदिर में पहली बार ध्वज वंदन, भगवान विश्वनाथ का भी तिरंगा श्रृंगार
गणतंत्र दिवस के मौके पर इस बार काशी विश्वनाथ में वो हुआ जो पहले कभी नहीं देखा गया. यहां पहली बार मंदिर परिसर के अंदर भारत माता की आरती उतारी गई. फिर ध्वज वंदन किया गया. इसके अलावा भगवान विश्वनाथ का भी तिरंगे से श्रृंगार किया गया.
देशभर में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. काशी विश्वनाथ मंदिर में इसको लेकर खासा उल्लास दिखा. यहां गणतंत्र दिवस पर पहली बार शास्त्री गणों ने स्वस्तिवाचन किया और डमरू बजाकर, पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्रीय ध्वज का वंदन किया.
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काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि धाम में स्थित भारत माता की प्रतिमा पर श्रद्धा एवं राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ भारत माता आराधना की गई. भारत माता आराधना के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व की प्रेरणा से भारत माता की प्रतिमा स्थल पर ही स्थापित राष्ट्रीय ध्वज की आराधना का ध्वज वंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया.
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उन्होंने आगे बताया कि इस दौरान डमरू वादन एवं शास्त्रीगणों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ तिरंगा ध्वज पर पुष्पांजलि अर्पित की गई. फिर भारत माता एवं राष्ट्रीय ध्वज की विधिवत आरती संपन्न हुई. कार्यक्रम में मंदिर न्यास के समस्त अधिकारीगण, कार्मिकगण और आम जनता शामिल रही.
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उन्होंने बताया कि मंगला आरती में बाबा विश्वनाथ का तिरंगा श्रृंगार किया गया. साथ ही आज सोमवार होने की वजह से अविमुक्तेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक तिरंगा लगाकर सम्पन्न किया गया. सबने भगवान विश्वनाथ से देश की समृद्धि एवं शांति की कामना की.
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बता दें इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और राष्ट्रप्रेम के रंग में डूबा नजर आया. ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ के नारे भी मंदिर परिसर में गूंजते रहे. इस मौके पर आस्था और राष्ट्रपेम का अद्भुत संगम देखने को मिला.
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काशी विश्वनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां भगवान शिव ‘विश्वनाथ’ या ‘विश्वेश्वर’ के रूप में विराजमान हैं. यह सदियों अध्यात्म, दर्शन और धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है. कहा जाता है कि इस मंदिर के दर्शन भर से आत्मिक शुद्धि और मोक्ष का मार्ग मिलता है.
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काशी विश्ववनाथ मंदिर गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित. इसके शिखर और गुंबद पर सोने की परत चढ़ी हुई है . वहीं, विश्वनाथ मंदिर के परिसर के गर्भगृह में शिवलिंग, नंदी प्रतिमा और अन्नपूर्णा देवी मंदिर भक्तों के बीच इस मंदिर के महत्वता को और बढ़ाते हैं.