मुरादाबाद में इमाम ने रोका ईद मिलादुन्नबी का जुलूस, 2 घंटे थमी रहीं सांसें; वजह से हर कोई हैरान
मुरादाबाद में ईद मिलादुन्नबी जुलूस को इमाम ने निकालने से साफ इनकार कर दिया. इसके कारण दो घंटे तक जुलूस रुका रहा. पूरा गांव जुलूस के लिए तैयार था, लेकिन इमाम रूठ कर मस्जिद में जाकर बैठे गए. काफी मान-मनौव्वल और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जुलूस शांतिपूर्ण माहौल में आगे बढ़ा.
मुरादाबाद के रतनपुर कलां में जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकलने वाला जुलूसे मुहम्मदी उस समय करीब दो घंटे तक रुक गया, जब इमाम ने इसकी कयादत से साफ इनकार कर दिया. पूरा गांव जुलूस के लिए तैयार था, लेकिन इमाम रूठ कर मस्जिद में जाकर बैठे गए. काफी मान-मनौव्वल के बाद जुलूस शांतिपूर्ण माहौल में आगे बढ़ा.
वहीं, जब मामला सामने आया तो हर कोई दंग रह गया. पता चला जुलूस में डीजे और बड़े म्यूजिक सिस्टम के कारण इमाम नाराज हो गए थे. जुलूस के संयोजक और इमाम सैय्यद मुफ्ती राहिद ने पहले ही जुलूस में डीजे और बड़े म्यूजिक सिस्टम के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी. लेकिन जब उन्होंने जुलूस में डीजे देखा तो मस्जिद से बाहर ही नहीं निकले.
डीजे हटाने के बाद आगे बढ़ा जुलूस
इमाम का कहना था कि पैगंबर मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश के मौके पर निकलने वाला जुलूस सादगी और धार्मिक मर्यादा के साथ होना चाहिए. उन्होंने डीजे और शोर-शराबे को इस आयोजन के अनुरूप नहीं माना. इसके बाद ग्रामीणों और इमाम के बीच काफी देर तक बातचीत और मान-मनौव्वल का दौर चलता रहा.
दूसरी ओर नौजवान युवक इसपर अरे हुए थे. मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया. युवाओं को समझाया गया और जुलूस में शामिल म्यूजिक सिस्टम वाली गाड़ियों को वापस भेज दिया गया. इसके बाद विवाद शांत हुआ और करीब दो घंटे की देरी के बाद सुबह लगभग 10 बजे जुलूसे मुहम्मदी सादगी और अनुशासित माहौल में रवाना हुआ.
उलेमा ने भी डीजे से दूरी की अपील की
मरकज़ी जमीयत-ए-अहले सुन्नत के नायब सदर मुफ़्ती मोहम्मद दानिश कादरी ने स्पष्ट बयान जारी कर कहा कि 1501वां मिलाद-उन-नबी पूरी दुनिया में शान के साथ मनाया जा रहा है. लेकिन जश्न की एक तय सीमा है. शहर के मुफ़्तीयान, खानकाहों के सज्जादगान और कमेटी ने तय किया है कि जुलूस में डीजे और गैर-जरूरी भारी गाड़ियों पर पूरी तरह बैन रहेगा.
साथ ही चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों की गाड़ियों का चालान होने पर कमेटी जिम्मेदार नहीं होगी है, जुलूस में केवल सादगी, खूबसूरत मॉडल और नबी की नात पढ़ते हुए आगे बढ़ने की इजाजत है.
पाकबड़ा में तिरंगे के साथ भाईचारे का संदेश
वहीं, पाकबड़ा के शनिवार बाजार स्थित जामा मस्जिद से काजी शम्मे आलम की सदारत में जुलूसे मुहम्मदी सादगी और अकीदत के साथ निकाला गया. हाफिज मु. अली ने नाते पाक पढ़ी और जुलूस गनी नगर, पंचायत घर, और थाने के सामने से होते हुए गुजरा.
जुलूस की खास बात यह रही कि युवाओं ने हाथ में इस्लामिक झंडों के साथ पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी लहराया है, जगह-जगह लंगर का आयोजन हुआ और फूलों की बारिश कर जुलूस का स्वागत किया गया. कार्यक्रम के समापन पर काजी शम्मे आलम ने देश में स्थायी अमन-चैन, खुशहाली और कौम की तरक्की के लिए विशेष दुआ कराई.
