UP के इस शहर में धुली मूंग की दाल खाने के लिए लगती है कतार, जानें क्या है खास; PHOTOS

यूपी की पीतल नगरी मुरादाबाद को तो अपना अलग ही जायका है. यहां सुबह सुबह धुली मूंग की दाल खाने की परंपरा है. ऐसी दाल जो खाने के बाद दिल और मन दोनों खुश हो जाए. इस दाल को बनाने का तरीका भी बेहद खास है. यह बेहद धीमी आंच पर बनती है.

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वैसे तो हर शहर का अपना जायका होता है. प्रयागराज में सुबह सुबह लोग दही जलेबी खाते हैं तो जौनपुर की इमरती भी काफी प्रसिद्ध है. यूपी की पीतल नगरी मुरादाबाद को तो अपना अलग ही जायका है. यहां सुबह सुबह धुली मूंग की दाल खाने की परंपरा है. ऐसी दाल जो खाने के बाद दिल और मन दोनों खुश हो जाए. इस दाल को बनाने का तरीका भी बेहद खास है. यह बेहद धीमी आंच पर बनती है.
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इस दाल की सबसे बड़ी खासियत स्वाद के साथ सेहत के लिए फायदेमंद होना है. यही वजह है कि इस दाल की लोकप्रियता ना केवल अपने देश में, बल्कि विदेशों में भी खूब है. कई देशों में यह दाल मुरादाबादी दाल के नाम से बनाई और बेची जाती है. ​वैसे तो यहां दाल काफी समय पहले से बनाई और खाती जाती रही है, लेकिन इस दाल का मौजूदा स्वरुप मुगल काल में मिला. माना जाता है कि शाहजहां के बेटे मुराद बख्श को यह दाल बेहद पसंद थी.
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धीरे धीरे इसके स्वाद का दायरा बढ़ा और शाही किचन से निकलकर यह दाल उस समय के जमींदारों के किचन तक पहुंची और आज के समय में यह दाल शहर के हर ढाबे, रेस्टोरेंट के अलावा हर चौराहे पर खड़ी रेहड़ियों पर भी मिल जाती है. आम तौर पर यह दाल सुबह के समय खाई जाती है, लेकिन दुकानों पर दोपहर बाद तक इस दाल को खाने वालों की कतार लगी मिल जाएगी.
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यदि आप भी अपने घर में इस दाल का जायका अपने घर में लेना चाहते हैं या फिर घर पर ढाबा-स्टाइल, पारंपरिक मुरादाबादी दाल का मज़ा लेना चाहते हैं, हम आपको यहां इसकी पूरी रेसिपी बता रहे हैं. इस रेसिपी की मदद से आप मुरादाबाद आए बिना ही अपने घर में इस जायकेदार डिस का आनंद ले सकते हैं.
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​पारंपरिक और ढाबा-स्टाइल मुरादाबादी दाल बनाने के लिए सबसे पहले पानी में भिगोई हुई धुली हुई मूंग दाल को कूकर में पर्याप्त पानी, नमक और हींग डालकर धीमी आंच पर पकाना होता है. मुरादाबाद के कारीगर बताते हैं कि कूकर के बजाय यदि पतीले में पकाएं तो स्वाद और अच्छा आएगा. शर्त यह है कि दाल ना केवल अच्छी तरह से गल जानी चाहिए, बल्कि पूरी तरह से पक जानी चाहिए.
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इसके बाद ढक्कन खोलकर हल्की आंच पर तब तक रखें, जबतक कि यह थोड़ी गाढ़ी ना हो जाए. यदि दाल ज़्यादा गाढ़ी हो जाए, तो इसमें थोड़ा-सा उबला हुआ पानी मिलाकर दो मिनट तक आंच पर रखे और फिर आखिर में गरमा-गरम दाल में मक्खन या देसी घी डालकर इसे सर्व कर सकते हैं. एक बार खाने के बाद गारंटी है कि आप इसे दोबारा खाना चाहेंगे.
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