क्या मंदिर तोड़कर संभल में बना जमा मस्जिद? RTI में पूछे सवाल के जवाब में ASI ने दिया ये जवाब
संभल जामा मस्जिद विवाद पर ASI ने RTI में चौंकाने वाला जवाब दिया है. ASI के अनुसार, मस्जिद का रिकॉर्ड 1526 से मिलता है, लेकिन इससे पहले के किसी मंदिर या खाली जमीन का कोई दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है. 1920 से यह इमारत ASI के संरक्षण में जामा मस्जिद के रूप में ही है. केंद्रीय सूचना आयोग ने भी ASI के जवाब को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी.
उत्तर प्रदेश के संभल में बहुचर्चित जामा मस्जिद का विवाद कोर्ट में लंबित है. इसी बीच आरटीआई में पूछे एक सवाल के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने चौंकाने वाला जवाब दिया है. एएसआई ने बताया कि इस मस्जिद का रिकॉर्ड 1526 में हुआ था, लेकिन इससे पहले का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है. ऐसे में साफ तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि इस स्थान पर मस्जिद से पहले कोई मंदिर था या खाली जमीन.
एएसआई के समक्ष दाखिल सूचना के अधिकार कानून के तहत आवेदन में पूछा गया था कि किन परिस्थितियों में संभल की जामा मस्जिद का निर्माण हुआ, निर्माण के वक्त मस्जिद की जमीन का मालिक कौन था, क्या यह मस्जिद किसी मंदिर को तोड़कर बनाया गया? इसके जवाब में एएसआई ने बताया कि इस तरह का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. एएसआई के मुताबिक प्राप्त दस्तावेजों में विवरण मिलता है कि मस्जिद का निर्माण मुगल शासन के दौरान 1526 में हुआ था.
1920 से एएसआई की जिम्मेदारी
एएसआई ने अपने जवाब में साफ कर दिया है कि इस इमारत को 1920 में टेकओवर किया गया था. उस समय से यह इमारत जामा मस्जिद के नाम से ही संरक्षित है. 1920 के पहले के किसी भी रिकॉर्ड में इस इमारत को किसी और नाम से उल्लेख किए जाने का कोई विवरण उपलब्ध नहीं है. इस समय भी यह एक मस्जिद के रूप में है, इसे समुदाय विशेष के लोग पूजा स्थल के रूप में इस्तेमाल करते हैं. एएसआई ने यह जवाब केंद्रीय सूचना आयोग में दाखिल अपील की सुनवाई में दिया है.
आयोग ने खारिज की अपील
केंद्रीय सूचना आयोग ने एएसआई के जवाब को सही ठहराते हुए कहा कि एएसआई की भूमिका रिकॉर्ड संरक्षित करने और सूचना के अधिकार कानून के तहत उपलब्ध रिकॉर्ड जारी करने की है. विभाग को नई जानकारी जुटाने या ऐतिहासिक शोध करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. इसी के साथ आयोग ने अपील खारिज कर दिया है. बता दें कि इसी सवाल को लेकर पिछले दिनों संभल का माहौल गरमा गया था. यहां तक कि कोर्ट द्वारा सर्वे कराने पर यहां हिंसा की घटना तक हुई थी.
