नहीं खुला गेट, सनरूफ से निकला था युवराज; बाहर आते ही कार ने खोले सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के राज
ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद उनकी कार ने कई राज खोले हैं. 70 फीट गहरे बेसमेंट से निकली कार से पता चला कि युवराज गेट खोलने की कोशिश के बाद सनरूफ से बाहर निकला था. इस मामले में अथॉरिटी की लापरवाही भी उजागर हुई है. पता चला है कि जिस प्लाट में कार गिरी थी, उसमें आसपास की सोसायटियों के सीवर का पानी गिरता था.
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार ने उसकी दर्दनाक मौत के कई राज उजागर किए हैं. एनडीआरएफ की टीम ने चार दिन के बाद इस कार को करीब 70 फीट गहरे बेसमेंट से बाहर निकाला है. कार की जांच में पता चला है कि अंतिम घड़ी में इंजीनियर युवराज ने गेट खोलने की खूब कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ तो सनरूफ खोलकर बाहर निकला था. हालांकि इसके बाद भी वह बेसमेंट से बाहर नहीं आ सका था.
एनडीआरएफ ने मंगलवार की शाम करीब 6:30 बजे युवराज की कार को बाहर निकाला है. कार 70 फीट गहरे बेसमेंट के दो फ्लोर के बीच में फंसी थी. एनडीआरएफ की दो टीमों ने 8 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद इस कार को बाहर निकालने में सफलता हासिल की है. गाड़ी बाहर आने पर पता चला कि उसका सनरूफ खुला हुआ है. गाड़ी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि युवराज ने अपनी जान बचाने के लिए पहले गेट से बाहर आने की कोशिश की. सफल नहीं हुआ तो सनरूफ खोलकर बाहर आया.
गाड़ी की छत से लगा रहा था गुहार
जांच में पता चला है कि युवराज गाड़ी की छत पर करीब 30 मिनट तक रहा था. वहीं से वह खुद को बचाने के लिए लोगों से गुहार लगाता रहा, लेकिन ठंड और बेसमेंट की गहराई की वजह से उसे बचाने के लिए किसी की हिम्मत नहीं पड़ी. इतने समय में गाड़ी में पानी भर गया और गाड़ी नीचे चली गई. एनडीआरएफ के अधिकारयों के मुताबिक मंगलवार की दोपहर करीब 12:00 बजे एनडीआरएफ की टीम घटना स्थल पर पहुंची थी. इसके बाद गाड़ी की तलाश शुरू हुई. करीब 1:00 बजे दो गोताखोर कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर 70 फीट गहरे पानी में उतरे और बेसमेंट के पहले फ्लोर पर जाकर रेस्क्यू शुरू किया.
ऐसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
फिर करीब 3:00 बजे मैग्नेटिक सेंसर के जरिए सर्च अभियान शुरू किया गया तो गाड़ी की लोकेशन दो बेसमेंट के बीच मिली. करीब 4:00 के आसपास फिर से दो गोताखोर बेसमेंट के दूसरे फ्लोर पर पहुंचे जहां पर गाड़ी फंसी हुई थी. वहां मिट्टी दलदली थी, इसलिए गाड़ी लगातार नीचे खिसकती जा रही थी. फिर रस्सी से गाड़ी को खींचकर बड़ी मुश्किल से ऊपर लाया गया. 6:00 बजे जब एनडीआरएफ की टीमों ने गाड़ी को बाहर निकाला तो पुलिस उसे खींचकर नॉलेज पार्क थाने पहुंचाया है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी उठे सवाल
मौत के दूसरे दिन युवराज के शव का पोस्टमार्टम कराया गया. रिपोर्ट में डॉक्टर ने लिखा था कि पानी में डूबने और फेफड़ों में करीब 3:30 लीटर पानी भरने से युवराज को कार्डियक अटैक आया था. डॉक्टरों के मुताबिक यदि समय रहते रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होता तो युवराज की जान बच सकती थी. इधर, गाड़ी निकालने में भी प्राधिकरण की लापरवाही सामने आई है. सिंचाई विभाग की चिट्ठी ने यह साफ कर दिया है कि प्राधिकरण के पास यहां ड्रेनेज सिस्टम ही नहीं है. आसपास की सोसाइटियों से निकलने वाला सीवर का पानी भी इसी खाली प्लॉट में छोड़ा जा रहा था. यह स्थिति उस समय है जब नोएडा प्राधिकरण साल 2023 में ही दावा किया था कि सेक्टर 150 में 4:30 करोड़ पर की लागत से सीवर सिस्टम तैयार किया गया है.
90 डिग्री टी पॉइंट बना हादसे की वजह
जब यह सेक्टर बसाया जा रहा था, तब प्राधिकरण के अधिकारियों ने खतरनाक 90 डिग्री का एक्टिव बिंदु बनाया. इसका मतलब यह है कि दिल्ली की तरफ से नोएडा आने वाले एक्सप्रेसवे के सर्विस रोड पर जो टी पॉइंट है वो बिल्कुल 90 डिग्री पर है. चूंकि सामने कोई बैरिकेडिंग या दीवार नहीं है, ऐसे में घने कोहरे में युवराज सीधे गाड़ी चलाते हुए इस प्लाट में आ गया और यह हादसा हो गया. इस घटना को खुद सीएम ने संज्ञान लिया है. उन्होंने तत्काल नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटा दिया.