नोएडा में हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए राहत, GPA मामलों पर अथॉरिटी ने बनाई 8 सदस्यीय कमेटी

नोएडा में GPA आधारित फ्लैट्स की लीज़ डीड न होने से हजारों खरीदार कानूनी और आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे थे. अब नोएडा अथॉरिटी ने इस मामले में 8 सदस्यीय समिति का गठन किया है. इससे नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों को जल्द ही राहत मिलने और मालिकाना हक मिलने की उम्मीद है.

बोर्ड बैठक के दौरान चेयरमैन दीपक कुमार Image Credit:

नोएडा में रेजिडेंशियल को ऑपरेटिव सोसायटियों में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के आधार पर खरीदे-बेचे गए फ्लैट्स का मामला लंबे समय से विवाद का कारण बना हुआ है. इन फ्लैट्स की लीज़ डीड नोएडा अथॉरिटी द्वारा निष्पादित नहीं की गई, जिससे खरीदारों को कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.

लीज़ डीड के अभाव में फ्लैट खरीदार बैंक लोन, प्रॉपर्टी बेचने, विरासत में स्थानांतरण और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में असमर्थ हो रहे थे. इसके साथ ही नोएडा अथॉरिटी को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा था. यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब सेक्टर-125 स्थित एयरफोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड ने बिके 729 फ्लैट्स की सूची नोएडा अथॉरिटी को सौंपी.

नोएडा अथॉरिटी की 221वीं बोर्ड बैठक में फैसला

जांच में सामने आया कि मूल आवंटियों ने लीज़ डीड निष्पादित किए बिना ही फ्लैट्स को आगे बेच दिया. शनिवार को नोएडा अथॉरिटी की 221वीं बोर्ड बैठक में इसपर चर्चा की गई. चेयरमैन एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने निर्णय लिया गया कि GPA से बिके फ्लैट्स की लीज़ डीड से जुड़े मामलों के समाधान के लिए विशेष समिति बनाई जाएगी.

बोर्ड बैठक में 8 सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला लिया गया. इस समिति में ग्रुप हाउसिंग, चीफ लीगल एडवाइजर, फाइनेंशियल कंट्रोलर, स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर, जीएम प्लानिंग और सिविल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. यह समिति GPA से बिके फ्लैट्स की लीज़ डीड निष्पादन की शर्तों और प्रक्रिया पर काम करेगी.

हजारों फ्लैट खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद

साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अथॉरिटी, सोसायटी और फ्लैट खरीदारों के बीच त्रिपक्षीय एग्रीमेंट को कैसे लागू किया जाए. इस फैसले के बाद नोएडा में हजारों फ्लैट खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है. समिति सकारात्मक सिफारिश देती है तो वर्षों से अटके GPA मामलों का समाधान निकल सकता है और खरीदारों को उनका अधिकार मिल सकेगा.

सूत्रों के माने तो कमेटी को 2 से 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद प्राधिकरण बोर्ड और शासन स्तर पर इस पर फैसला लिया जाएगा. अगर सब कुछ तय समय पर हुआ तो 2026 के मध्य तक GPA मामलों में कोई ठोस नीति सामने आ सकती है. अधिकारियों का कहना है कि मामला जटिल है, समाधान निकालने की पूरी कोशिश है.