‘मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं…’, UGC नियमों के खिलाफ कुमार विश्वास, कर दी वापस लेने की मांग

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का विरोध अब बड़े पैमाने पर फैल रहा है. मशहूर कवि कुमार विश्वास ने भी इस कैंपेन में शामिल होकर नियम वापस लेने की मांग की है. मंगलवार को उन्होंने ट्वीट करते हुए कविता लिखी- "चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा."

कुमार विश्वास (फाइल फोटो)

यूजीसी नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का विरोध अब बड़ा रूप अख्तियार करता हुआ जा रहा है. मशहूर कवि कुमार विश्वास ने भी यूजीसी नियमों का विरोध शुरू कर दिया है और इसे वापस लेने के लिए चल रहे कैंपेन में शामिल हो गए हैं. मंगलवार को कुमार विश्वास ने एक कविता ट्वीट करते हुए कहा, ‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा.’ इसके साथ ही #UGC_RollBack भी ट्वीट किया.

दरअसल, यूजीसी के नए नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) का विरोध मुख्य रूप से इसलिए हो रहा है क्योंकि इन्हें सामान्य वर्ग के छात्रों-शिक्षकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण और दुरुपयोग की संभावना वाला माना जा रहा है. नए नियम का विरोध करने वाले कहते हैं कि यह सामान्य वर्ग को ‘डिफॉल्ट अपराधी’ बनाता है, क्योंकि कमेटी में SC/ST/OBC/EWS/महिला/दिव्यांग प्रतिनिधि अनिवार्य हैं, लेकिन सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा. इससे झूठी शिकायतों का डर है.

मंसूर उस्मानी के घर पहुंचे कुमार विश्वास

UGC के नए नियमों के विरोध के बीच कुमार विश्वास सोमवार को शायर डॉ. मंसूर उस्मानी के घर पहुंचे. दरअसल, मंसूर उस्मानी के परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा, जब 14 और 15 जनवरी की दरमियानी रात एक घरेलू हादसे में उनकी सुपुत्री हुमा उस्मानी का आकस्मिक निधन हो गया है. इस हृदयविदारक घटना से न केवल मुरादाबाद बल्कि देश-विदेश में मौजूद उनके प्रशंसक और साहित्य जगत स्तब्ध रह गया है. नम आंखों के बीच हुमा को सुपुर्द-ए-खाक किया गया.

सोमवार को जब मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास मुरादाबाद पहुंचे, तो उन्होंने कार्यक्रम की चकाचौंध से पहले अपने पुराने मित्र का दर्द बांटना जरूरी समझा है. कवि कुमार विश्वास ने जिला प्रशासन से विशेष आग्रह किया कि वे कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले मंसूर उस्मानी साहब के घर जाना चाहते हैं. प्रशासन की मौजूदगी में कुमार विश्वास ने मंसूर उस्मानी व उस्मानी परिवार से मुलाकात की और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े होने का भरोसा दिया है.

‘साहित्य जगत के लिए दुखद है घटना’

​मंसूर उस्मानी के घर पर कुमार विश्वास करीब 20 मिनट रुके और परिवार के लोगों से बातचीत की है. कुमार विश्वास ने कहा कि मुरादाबाद हमेशा से कविता और शायरी का एक महान केंद्र रहा है, जिसने जिगर मुरादाबादी, महेश्वर तिवारी और हुल्लड़ मुरादाबादी जैसे दिग्गज दिए हैं, मंसूर उस्मानी उसी परंपरा की एक मजबूत कड़ी हैं, उनके घर हुई यह दुर्घटना न केवल एक परिवार की क्षति है, बल्कि साहित्य जगत के लिए भी अत्यंत दुखद है. डॉ.कुमार विश्वास ने एक भाई के नाते मंसूर उस्मानी साहब का हाथ थामकर उन्हें सांत्वना दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की गई है.

कुमार विश्वास ने भावुक होकर कहा कि जैसे ही उन्हें सुबह इस हादसे की सूचना मिली, उनका मन व्यथित हो उठा था. कुमार विश्वास ने स्पष्ट किया कि कला और साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना भी है… मंसूर उस्मानी साहब और उनके परिवार को इस असीम दुख को सहने का साहस मिले, इसी कामना के साथ उन्होंने इस परिजनों से व्यक्तिगत मुलाकात की है.