लखनऊ से नेपाल, फिर नागपुर… श्रद्धा दुबे की फरारी का पूरा रूट सामने आया

शिवा शर्मा केस में आरोपी श्रद्धा दुबे ने 10 दिन तक पुलिस को चकमा देने के लिए 2200 किमी का सफर तय किया. अजनबियों के मोबाइल से इंटरनेट का इस्तेमाल कर फरारी काटी. नेपाल से नागपुर तक बदलती रही लोकेशन. हालांकि, जिस इंटरनेट के सहारे वह बच रही थी, उसी ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचाया.

नेपाल से नागपुर तक फरारी का सफर: कैसे बदले श्रद्धा दुबे ने ठिकाने? Image Credit:

कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी श्रद्धा दुबे की फरारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. करीब 10 दिनों तक पुलिस को चकमा देने के लिए उसने शहर बदले, होटल और लॉज बदले, गाड़ियां बदलीं और अपनी पहचान छिपाने के लिए बुर्के का सहारा लिया. मोबाइल की लोकेशन ट्रेस न हो, इसलिए सिम कार्ड निकालकर फेंक दिए. बातचीत के लिए फेसटाइम और व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया और इंटरनेट चलाने के लिए राह चलते लोगों, रिक्शा चालकों और कैब ड्राइवरों के मोबाइल का सहारा लिया. लेकिन पुलिस से बचने की उसकी यही रणनीति आखिरकार गिरफ्तारी की वजह बन गई.

श्रद्धा ने अपनी बहन रश्मि और चालक दानिश के साथ करीब 2200 किलोमीटर का सफर तय किया. पुलिस जिन ठिकानों पर पहुंचती, आरोपी वहां से पांच से छह घंटे पहले ही निकल चुके होते थे. आखिरकार नागपुर में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया.

सिम निकाला, लेकिन इंटरनेट से बना रहा पुलिस का संपर्क

श्रद्धा और उसके साथियों ने फरारी के दौरान अपने मोबाइल नंबरों से सामान्य कॉल नहीं की. तीनों ने सिम कार्ड निकाल दिए, ताकि पुलिस मोबाइल लोकेशन के जरिए उन तक न पहुंच सके. हालांकि, कुछ समय बाद उनके मोबाइल उपकरणों पर इंटरनेट सक्रिय होने के संकेत मिलने लगे. कभी इंटरनेट चलता तो कुछ देर बाद बंद हो जाता.

पुलिस आईपी एड्रेस के आधार पर कनेक्शन की पड़ताल करने लगी, लेकिन हर बार लोकेशन तक पहुंचने पर पता चलता कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति कोई रिक्शा चालक या कैब ड्राइवर है. दरअसल, आरोपी जिस वाहन में सफर करते, उसी के चालक के मोबाइल से इंटरनेट कनेक्शन लेकर बातचीत करते थे. इससे जांच टीम बार-बार वास्तविक ठिकाने तक पहुंचने से चूकती रही.

नेपाल से नागपुर तक बदलती रही लोकेशन

9 अक्तूबर को शिवा शर्मा की मौत के बाद श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और चालक दानिश के साथ केजीएमयू पहुंची थी. इसके बाद तीनों वहां से निकल गए. पुलिस के मुताबिक, वे सीतापुर, महमूदाबाद और बहराइच होते हुए रुपईडीहा सीमा के रास्ते नेपाल पहुंच गए.

नेपाल के बुटवल में बिना पहचान पत्र वाले होटल में ठहरने की जानकारी सामने आई, लेकिन पुलिस टीम के पहुंचने तक आरोपी वहां से निकल चुके थे. इसके बाद नेपाल के अलग-अलग इलाकों में ठिकाने बदलते रहे. 16 अक्तूबर के आसपास भारत लौटने के बाद भी उनकी आवाजाही जारी रही.

महराजगंज के भगवानपुर बॉर्डर से भारत में दाखिल होने के दौरान श्रद्धा ने पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहना. बताया गया कि उसने ट्रॉली बैग स्थानीय चालक को देकर कपड़े के झोले खरीदे. इसके बाद किराये की गाड़ी से नौतनवा होते हुए रायबरेली पहुंची. वहां कुछ घंटे रुकने के बाद दूसरी टैक्सी से लखनऊ आउटर होते हुए आगरा चली गई.

लखनऊ में बाइट दी, फिर महाराष्ट्र के लिए निकली

17 अक्तूबर को श्रद्धा आगरा के एक होटल में ठहरी. इसके बाद 18 अक्तूबर को वह लखनऊ पहुंची और विभूतिखंड इलाके में एक न्यूज एजेंसी को बाइट दी. शिवा शर्मा की मौत को आत्महत्या बताते हुए उसने खुद को निर्दोष बताया था. उसका बयान मीडिया में प्रसारित होने के बाद पुलिस की तलाश और तेज हो गई.

इसके बाद श्रद्धा ने लखनऊ से नागपुर जाने के लिए अर्टिगा टैक्सी बुक की. रास्ते में कानपुर पहुंचकर उसने गाड़ी बदल दी. दूसरी टैक्सी से फतेहपुर, सतना समेत कई जगहों से होते हुए नागपुर की ओर बढ़ी. पुलिस के लिए यह लगातार बदलते वाहनों और ठिकानों के कारण चुनौतीपूर्ण बन गया.

कैब ड्राइवर के मोबाइल ने खोल दिया राज

श्रद्धा को पकड़ने में सबसे अहम सुराग नागपुर ले जाने वाली कैब के चालक के मोबाइल से मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धा ने उस मोबाइल के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल किया था. कनेक्शन के सक्रिय होने और बीच-बीच में बंद होने के संकेतों के आधार पर पुलिस ने संबंधित रूट पर निगरानी बढ़ाई.

फतेहपुर में लोकेशन मिलने के बाद प्रयागराज से एसटीएफ की टीम भी सक्रिय हुई. जांच टीम सुरागों का पीछा करते हुए नागपुर तक पहुंची. जब कैब चालक आरोपियों को छोड़कर वापस निकला, तो लखनऊ पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर नागपुर पुलिस ने उसे पकड़ लिया. इसी चालक की मदद से पुलिस श्रद्धा के फ्लैट तक पहुंची और 20 अक्तूबर को श्रद्धा, रश्मि और दानिश को गिरफ्तार कर लिया.

इस तरह जिस इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल श्रद्धा पुलिस की नजरों से बचने के लिए कर रही थी, वही उसकी गिरफ्तारी का अहम सुराग बन गया.

10 दिन तक पुलिस से आगे कैसे रही श्रद्धा?

इस पूरे मामले में फरारी के दौरान बार-बार ठिकाने बदलना, सिम कार्ड का इस्तेमाल न करना, दूसरे लोगों के मोबाइल से इंटरनेट चलाना और अलग-अलग वाहनों में सफर करना अहम पहलू रहे. पुलिस कई ऐसे ठिकानों तक पहुंची, जहां से आरोपी कुछ घंटे पहले ही निकल चुके थे.

मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और आरोपियों के नेपाल पहुंचने को लेकर भी सवाल उठे. शिवा शर्मा की मौत 9 अक्तूबर को हुई थी, जबकि मामले में एफआईआर 10 अक्तूबर को दर्ज हुई. इसके बाद तलाश तेज हुई, इनाम की राशि बढ़ाई गई और विभिन्न टीमों को लगाया गया.

20 अक्तूबर को नागपुर में गिरफ्तारी के बाद श्रद्धा, रश्मि और दानिश को अदालत में पेश किया गया. ट्रांजिट रिमांड मिलने पर पुलिस उन्हें आज लेकर लखनऊ पहुंचेगी.

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