कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ और सबूत पेश करेगी उन्नाव रेप पीड़िता, हाईकोर्ट में दी अर्जी

उन्नाव रेप पीड़िता कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ और भी सबूत पेश करने की तैयारी में है. इसके लिए उसने हाईकोर्ट में अर्जी देकर अपनी दी है. बता दें कि इस केस में इस केस में सेंगर को दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की कहानी

उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी देकर पूर्व MLA कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ और सबूत पेश करने की अपील की है. इस एप्लीकेशन के साथ कोई डॉक्यूमेंट अटैच नहीं था. ऐसे में कोर्ट ने पीड़िता को 31 जनवरी तक ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स फाइल करने का निर्देश दिया. इसके अलावा कोर्ट ने कुलदीप सेंगर के साथ-साथ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को भी 2 हफ्ते के अंदर एप्लीकेशन का जवाब फाइल करने का निर्देश दिया है. बता दें कि इस केस में सेंगर को दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

पीड़िता की अर्जी जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई थी. कोर्ट ने कहा कि अपील की सुनवाई आखिरी स्टेज में है. सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से पेश हुए वकील महमूद प्राचा ने कहा कि पीड़िता आगे सबूत रिकॉर्ड करने यानी पेश करने की मांग करती है. पीड़िता ने स्कूल रिकॉर्ड के मुताबिक उसकी जन्मतिथि समेत और अन्य डॉक्यूमेंट पेश करने की मांग की है. वहीं, कुलदीप सिंह सेंगर की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन कुलदीप सेंगर की तरफ से पेश हुए.

हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा कर दी थी सस्पेंड

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सज़ा सस्पेंड कर 23 दिसंबर, 2025 को  ज़मानत दे दी थी. हालांकि, कुछ दिनों बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर, 2025 को ऑर्डर पर रोक लगा दी थी. अब पीड़िता ने साल 2020 की कुलदीप सेंगर की अपील में सबूत पेश करने के लिए नई अर्जी दी है.

कुलदीप सेंगर की सज़ा सस्पेंड करते हुए, कोर्ट ने मुख्य रूप से यह माना था कि उसके खिलाफ POCSO एक्ट के सेक्शन 5(c) के तहत अपराध नहीं बनता है. कोर्ट ने माना कि, पहली नजर में, यह अपराध एक्ट के सेक्शन 5 के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के तौर पर क्वालिफ़ाई नहीं करता.

कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि अपील करने वाले, सेंगर को POCSO एक्ट के सेक्शन 5(c) या इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 376(2)(b) के लिए “पब्लिक सर्वेंट” की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता. ट्रायल कोर्ट ने पहले सेंगर को गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के लिए इस आधार पर दोषी ठहराया था कि वह पब्लिक सर्वेंट की परिभाषा में आता है.

CBI कोर्ट ने दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई

कुलदीप सेंगर को 2019 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की से रेप के लिए स्पेशल CBI कोर्ट ने दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. कुलदीप सेंगर 2020 में पीड़िता के पिता की गैर-इरादतन हत्या से जुड़े एक अलग मामले में 10 साल की सज़ा भी काट रहे हैं.

सीबीआई ने इन मामलों की भी की थी जांच

पीड़िता और उसके परिवार ने पूर्व विधायक और उसके साथियों पर लगातार परेशान करने और डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों पर हमलों सहित कई संबंधित मामलों की भी जांच की थी.

( जीतेन्द्र भाटी की रिपोर्ट)