आखिरी सांस तक लटकाओ… दरिंदे को फांसी की सजा सुनाते समय बोले जज, 6 साल की मासूम से की थी हैवानियत
उत्तर प्रदेश के बांदा में एक 6 साल की मासूम के साथ हुई हैवानियत के मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. मामले की सिर्फ 56 दिनों में सुनवाई पूरी कर कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने मामले को जघन्य अपराध करार देते हुए दोषी को किसी तरह का राहत देने से इनकार कर दिया.
उत्तर प्रदेश में बांदा की अदालत ने छह साल की मासूम के साथ हैवानियत के मामले में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है. मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पाक्सो व अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत में हुई. जहां दोनों पक्षों की दलील सुनते हुए अदालत ने महज 56 दिनों में सुनवाई पूरी की है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस हैवान पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
विशेष लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम के मुताबिक मामला बांदा के कालिंजर थाना क्षेत्र का है. यहां के एक गांव में रहने वाली पीड़िता के पिता ने 25 जुलाई 2025 को पुलिस में शिकायत दी थी. बताया था कि घटना के वक्त वह अपनी पत्नी के साथ खेतों में काम कर रहे थे. वहीं उनकी छह साल की बेटी घर में थी. इसी दौरान उसके पड़ोस में रहने वाले अमित रैकवार ने उनकी बेटी को पैसे देकर गुटखा लेने भेजा.
जान से मारने की कोशिश
वहीं जब उनकी बेटी गुटखा लेकर आरोपी के घर पहुंची तो उसने पकड़कर बल पूर्वक उसके साथ हैवानियत को अंजाम दिया. यही नहीं, आरोपी ने मासूम बच्ची के नाजुक अंगों को दांत से काटा और फिर हाथ पैर तोड़कर उसकी हत्या करने की भी कोशिश की थी. पीड़ित पिता ने बताया कि शाम को जब उनकी पत्नी वापस आईं और बेटी की खोजबीन हुई तो वह पड़ोसी के आंगन में खून से लथपथ मिली. उसके प्राइवेट पार्ट से खून बहर रहा था. यह देखकर आनन फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया.
पुलिस ने बनाई मजबूत चार्जशीट
मासूम बच्ची ने स्वस्थ होने पर अपने परिजनों और पुलिस के सामने पूरा घटनाक्रम बयां किया था. इसके बाद पुलिस ने वारदात की निशानदेही कराते हुए मजबूत चार्जशीट बनाई और कोर्ट में पेश कर दिया. मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक दीपेंद्र कुमार सिंह ने की थी. इस मामले में कोर्ट ने साक्ष्य और गवाहों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को किसी भी तरह का राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने इसे जघन्य वारदात बताते हुए फांसी की सजा सुनाई है.
