बृजभूषण शरण की राष्ट्र कथा में पहुंचे धनंजय सिंह, MLA बेटों ने छुआ पैर; Video वायरल
गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह की राष्ट्र कथा में पूर्व सांसद धनंजय सिंह के पहुंचने और उनके बेटों द्वारा पैर छूने का वीडियो वायरल हुआ है. यह मुलाकात यूपी की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे रही है. मंच पर आरएसएस के प्रांत प्रचारक की उपस्थिति ने इस घटना को और महत्वपूर्ण बना दिया है, जिसे भविष्य की राजनीति का संकेत माना जा रहा है.
उत्तर प्रदेश के गोंडा में दो बाहुबली एक साथ एक मंच पर दिखे. इनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं. हम बात कर रहे हैं पूर्व सांसद और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व सांसद धनंजय सिंह की. वैसे तो इनकी मुलाकात बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आयोजित राष्ट्र कथा के उपलक्ष्य में हुई है, लेकिन संदेश दूर तक गया है. खासतौर पर वह वीडियो फुटेज, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह के सांसद बेटे करण भूषण सिंह और विधायक बेटे प्रतीक भूषण सिंह ने धनंजय सिंह के पैर छुए.
वायरल वीडियो में धनंजय सिंह भी उनके इस अपनापन का सम्मान करते नजर आ रहे हैं. वह लपक कर दोनों को गले लगा लेते हैं. और मंच की ओर बढ़ जाते हैं. फिर वह बृजभूषण शरण सिंह का आशीर्वाद लेने के बाद राष्ट्र कथा में हाजिरी लगाते हैं. इस दौरान वह मंच पर कथा वाचक रितेश्वर महाराज का भी आर्शीवाद लेते हैं. इसके बाद वह आरएसएस के प्रांत प्रचारक कौशल जी के साथ बैठकर कथा भी सुनते हैं.
फिर क्यों गरमाने लगी राजनीति?
राष्ट्रकथा में आने या बृजभूषण शरण सिंह से धनंजय सिंह की मुलाकात को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. इसमें आरएसएस के प्रांत प्रचारक के साथ मंच साझा करने को लेकर भी राजनीतिक हलके में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. इसका संदेश काफी दूर तक गया है. माना जा रहा है कि यह भविष्य की राजनीति का संदेश है. इसी मंच पर सुशील सिंह भी नजर आते हैं और विनीत सिंह भी. हालांकि इस संबंध में न तो धनंजय सिंह ने कोई प्रतिक्रिया दी है और ना ही बृजभूषण शरण ने ही कुछ कहा है.
एक जनवरी से चल रही कथा
बृजभूषण शरण सिंह के नंदिनी निकेतन में एक जनवरी से रितेश्वर महाराज की राष्ट्र कथा हो रही है. आठ दिवसीय इस राष्ट्र कथा में सोमवार को भोजपुरी के पॉवर स्टार पवन सिंह भी पहुंचे थे. इस कथा का शुभारंभ अयोध्या से पधारे साधु-संतों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ था. इस कथा के लिए नवाबगंज से अयोध्या तक 28 प्रवेश द्वार बनवाए गए हैं. इन सभी द्वारों के नाम भगवान राम के पूर्वजों के नाम पर रखा गया है.
