PDA पंचांग: सपा की 2027 में BJP को टक्कर देने की नई रणनीति, जानें इसमें क्या है खास

2027 विधानसभा चुनाव होने अब डेढ़ साल से भी कम वक्त बचा है. ऐसे में पार्टियां एक-दूसरे को टक्कर देने के लिए अपनी रणनीतियों को मजबूत करने में लगी हुई हैं. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी ने पीडीए पंचांग लागू कर दिया है. आइए जानते हैं कैसे समाजवादी पार्टी इस पंचांग के जरिए बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी कर रही है.

पीडीए पंचांग

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अब पीडीए पंचांग 2026 जारी कर दिया है. इसका प्रकाशन समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव एवं अखिल भारतीय चौरसिया महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने किया है. इस पंचांग को समाजवादी पार्टी पूरे उत्तरप्रदेश में पिछड़ों और दलितों के बीच बंटवाएगी. इसकी शुरुआत वाराणसी के कैंट विधानसभा सीट से हुई.

पंचांग में क्या है विशेष?

इस पंचांग में महापुरुषों की जयंतियों और त्योहारों के अलावा उन नेताओं और घटनाओं का भी ज़िक्र है जो पिछड़े और दलित समाज से संबंधित हैं. पंचांग में पहली जनवरी को पीडीए शौर्य दिवस के रूप में दिखाया गया है. इस दिन को रोहिणी नक्षत्र का बताया गया. साथ ही इसे भीमा कोरेगांव संघर्ष की बरसी के रूप में उल्लेख किया गया है. ऐसे ही 3 जनवरी को सावित्री बाई फूले, 22 जनवरी को जनेश्वर मिश्र की, 24 जनवरी को कर्पूरी ठाकुर की जयंती के रूप में दिखाया गया है.

7 फरवरी को रमाबाई अम्बेडकर और 8 फरवरी को डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन की जयंती के तौर पर दिखाया गया है. 13 मार्च को बाबू शिवदयाल चौरसिया और एक सितंबर को ललई यादव की जयंती का उल्लेख किया गया है. हींस सात अगस्त को मंडल दिवस के रूप में अंकित है. साथ इसके साथ इस पंचाग के में विशेष तौर पर भी ये बताया गया है कि इस दिन ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा हुई थी. इसके अलावा इस पंचांग में मुलायम सिंह यादव, पेरियार, कांशीराम, राम मनोहर लोहिया जैसे बड़े समाजवादी नेताओं की जयंती को भी जगह मिली है.

समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव और पीडीए पंचांग के सूत्रधार डॉक्टर अजय चौरसिया कहते हैं कि पंचांग में जिन महापुरुषों का ज़िक्र है उनकी स्वीकार्यता हर समाज के लोगों में है. महापुरुष किसी समाज विशेष के नही होते हैं. इस पंचांग का उद्देश्य है कि पीडीए समाज के लोग भी उन महापुरुषों के बारे में जानकारी हासिल कर सकें.

2024 को दोहराना चाहती है सपा

राजनैतिक विश्लेषक विजय नारायण का मानना है कि समाजवादी पार्टी फिर से 2024 को दोहराना चाहती है. इसलिए 2024 के ही तर्ज पर 2027 से पहले पीडीए फॉर्मूले पर ही बीजेपी को घेरने की तैयारी है. वहीं, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने इस पंचांग को संकुचित सोच वाला बताया है.

शंकराचार्य ने पीडीए पंचांग की आलोचना

शंकराचार्य ने कहा कि हम संकुचित अवधारणा पर आधारित पंचांग को कैसे स्वीकार कर सकते हैं. आप सिर्फ समाजवादी पंचांग भी निकालते तो भी कोई समस्या नही थी. लेकिन आप ने पीडीए लिख कर एक बड़े वर्ग को इस पंचांग से बाहर कर दिया. शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि जब आपका पीडीए पंचांग है तो फिर आपने होली और दिवाली क्यूं छापा? होली और दिवाली तो पीडीए से इतर समाज के लोग भी मनाते हैं. इस पंचांग के जरिए समाजवादी पार्टी पीडीए और सर्व समाज दोनों को छलने का काम कर रही है.