सरकार-प्रशासन चुप, BJP के बड़े नेताओं का मनुहार… क्या मान जाएंगे अविमुक्तेश्वरानंद?
प्रयागराज प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद ने खूब तूल पकड़ा था. लेकिन अब इस मसले पर शासन और प्रशासन शांत है. लगातार दो नोटिस भेजे जाने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को तीसरा नोटिस नहीं भेजा गया है. इस बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का रुख अविमुक्तेश्वरानंद के लिए नरम दिखा. उमा भारती ने भी इस मामले में प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने की कोशिश हो रही है.
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच हुआ विवाद अब भी जारी है. अविमुक्तेश्वरानंद 18 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन से ही धरने पर बैठे हुए हैं. वह लगातार प्रशासन और शासन के खिलाफ बयान भी दे रहे हैं. लेकिन इधर सरकार और प्रशासन शांत है. लगातार दो नोटिस भेजे जाने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को तीसरा नोटिस नहीं भेजा गया है. इस बीच शासन के पहले बयानों से इतर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का रुख अविमुक्तेश्वरानंद के लिए नरम दिखा.
डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सॉफ्ट स्टैंड अपनाते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से संयम और संवाद की अपील की. उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को पूज्य संत करार दिया है. उन्होंने कहा कि भगवान शंकराचार्य जी से प्रार्थना है कि अपना क्रोध समाप्त कर पवित्र संगम में स्नान करके एक अनुकूल संदेश देने की कृपा करें. उधर अविमुक्तेश्वरानंद भी केशव प्रसाद मौर्या पर नरम रूख अपनाते दिखे. उन्होंने डिप्टी सीएम को समझदार नेता बताया.
उमा भारती प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया
उधर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शंकराचार्य विवाद को लेकर अपने X अकाउंट पर एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा क मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा. लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है. यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है.
राज्य मंत्री जेपीएस राठौर ने क्या कहा?
राज्य मंत्री जेपीएस राठौर ने गणतंत्र दिवस पर मुरादाबाद में पुलिस लाइन में कार्यक्रम में हिस्सा लिया है,जहा जीपीएस राठौर ने प्रयागराज में शंकराचार्य के धरने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संतों का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन सभी को व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए. विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अक्सर अशांति फैलाने वालों का साथ देते हैं.
क्या मान जाएंगे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
उधर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के मनुहार के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रूख उनपर तो नरम है. लेकिन प्रयागराज प्रशासन और शासन पर वह अब भी भड़के हुए हैं. उन्होंने कहा है कि वे गंगा स्नान तब ही करेंगे जब उन्हें रोकने वाले लोग ससम्मान स्नान कराने के लिए ले जाएंगे. ऐसे में फिलहाल, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने जिद पर कायम है.
अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में तीनों शंकराचार्य
बता दें कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जब स्नान करने के लिए जा रहे थे तो प्रशासन भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें पैदल जाने को कहा. इस बीच प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच झड़प हो गई. आरोप है कि पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की शिखाओं को पकड़कर घसीटा और उन्हें पीटा. तबसे ही अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर हैं. उनके पक्ष में अन्य शंकराचार्य भी आ गए हैं. उन्होंने प्रशासन के रवैये की निंदा की और अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने की मांग की है.
