राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर रोक, हाईकोर्ट ने अपने ही आदेश को बदला; अब 20 अप्रैल को सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी पर FIR दर्ज करने के अपने ही आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा कि कांग्रेस नेता को बिना नोटिस जारी किए FIR का आदेश नहीं दिया जा सकता है. अब 20 अप्रैल को सुनवाई होगी, जिससे आरोपी को भी सुनवाई का अधिकार मिलेगा.
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दोहरी नागरिकता मामले में शनिवार को अपने ही आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट का मानना है कि राहुल गांधी को बिना नोटिस जारी किए FIR का आदेश नहीं दिया जा सकता. हाईकोर्ट में अब इसपर 20 अप्रैल को अलगी सुनवाई होनी है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने बीते दिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था. कोर्ट ने साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली पुलिस स्टेशन को FIR दर्ज कर मामले की जांच के आदेश दिए थे.
ऐसे मामलों में आरोपी को भी सुनवाई का अधिकार
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की सिंगल बेंचे ने पहले ओपन कोर्ट में आदेश डिक्टेट कर दिया था और यह माना जा रहा था कि बिना नोटिस के ही आगे की कार्रवाई होगी. लेकिन बाद में कोर्ट के सामने एक फुल बेंच का अहम फैसला आया, जिसमें कहा गया है कि ऐसे मामलों में आरोपी को भी सुनवाई का अधिकार मिलता है. ऐसे में प्रस्तावित आरोपी को नोटिस भेजना जरूरी है.
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने इसी कानूनी स्थिति को देखते हुए अपना रुख बदला और साफ किया कि बिना नोटिस दिए मामले का अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता. अब कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर देने की बात कही है, अब मामले में 20 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी. कोर्ट ने शनिवार को अपनी वेबसाइट पर आदेश की जानकारी दी.
हम CJI से इसकी शिकायत करेंगे- विग्नेश शिशिर
दरअसल, कर्नाटक में रहने वाले एस. विग्नेश शिशिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कांग्रेस नेता ने ब्रिटिश नागरिकता रखने के साथ ब्रिटेन में वोटिंग में भी भाग लिया था.
यह याचिका आपराधिक प्रार्थना-पत्र (क्रिमिनल एप्लीकेशन) के रूप में दाखिल की गई थी, जिसमें 28 जनवरी 2026 को स्पेशल MP-MLA मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी गई थी. जिसमें निचली अदालत ने FIR दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट के फैसला के बाद विग्नेश शिशिर ने कहा कि वह अब CJI से इसकी शिकायत करेंगे.
