कैसे हुआ 200 करोड़ की जमीन का फर्जीवाड़ा? एक्शन आए DM, 55 लोगों पर FIR

औरैया जिले में जमीन कब्जाने को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए 200 करोड़ रुपये की 48 एकड़ जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था. अब इस मामले में 55 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. जिलाधिकारी इंद्रमणि त्रिपाठी के निर्देश पर ये कार्रवाई की गई है.

जिलाधिकारी इंद्रमणि त्रिपाठी

औरैया के जिलाधिकारी डॉक्टर इंद्रमणि त्रिपाठी ने जमीन कब्जाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है. इस मामले में कुल 55 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. इस मामले में कुल 200 करोड़ की 48 एकड़ ज़मीन पर कब्जा करने का मामला सामने आया है. वैसुंधरा में चकबंदी के दौरान फर्जी डॉक्यूमेंट के जरिए यहां की जमीन को अपने नाम कराया गया था. SDM कोर्ट के आदेश पर ज़मीन को ग्रामसभा में दर्ज कराया गया. जिलाधिकारी के निर्देश पर लेखपाल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराया है. इस मामले में युवतियां और राजनैतिक परिवार के लोग भी शामिल हैं. यहां 1987-88 में बनवाए गए फर्जी पट्टों से करोड़ों रुपये का मुआवज़ा भी हड़पा गया था. अब दिबियापुर थाने में केस दर्ज करने के बाद इस मामले की जांच की जा रही है.

औरैया जिले के दिबियापुर नगर पंचायत क्षेत्र में एनटीपीसी, गेल जैसी देश की नवरत्न कंपनियां होने की वजह से यहां की जमीन बेशकीमती मानी जाती हैं. वेसुंधरा गांव में कुछ लोगों द्वारा चकबंदी के दौरान फर्जीवाड़ा करके जमीन को अपने नाम करवा लिया था. इस 48 एकड़ जमीन की बाजार कीमत 200 करोड़ रुपए आंकी गई है. एसडीएम कोर्ट के आदेश पर जमीन को फिर से ग्राम सभा में दर्ज कराया गया है.

जमीन का किया घोटाला

वहीं जिलाधिकारी डॉक्टर इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि अभिलेखों में फर्जी फिकेशन करके लोगों ने अपने नाम जमीन चढ़वाई. उसके बाद इसमें प्रतिकर भी लिया. गेल से प्रतिकर लेकर फरार हो गए. कुछ लोग यहां के थे भी नहीं ऐसे लोगों के खिलाफ फाइनेंशियल क्राइम और जमीन का घोटाला करने के उद्देश्य उनके नाम वापस ग्राम सभा की जमीन में दर्ज कर दिए गए हैं. जिनके साथ फ्रॉड हुआ था. ऐसे लोगों के खिलाफ हम लोगों ने आपराधिक मामले का केस भी दर्ज कराया है.

रिकवरी के लिए भी हम लोग कोशिश कर रहे हैं जो पैसा उन्होंने लिया है सरकार को वापस करें. जमीन ऐसी थी जो ग्राम सभा की थी और कुछ लोगों ने अपने नाम फर्जी फिकेशन करके नाम चढ़वाया. उसके बाद गेल से मुआवजा उठाकर वह लोग गायब हो गए. उसके बाद जांच पड़ताल हुई तो यह पता चला कि वह जमीन वास्तव में ग्राम सभा की थी. व्यक्तिगत लोगों की नहीं थी. इसलिए उसमें एफआईआर दर्ज करवाई गई है. साथ ही रिकवरी का भी काम किया जा रहा हैं. कुल 55 लोग हैं जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है.

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