चंदा चोरी: अब कैसे चलेगा राम मंदिर का सिस्टम? अनिल मिश्रा और चंपत राय के इस्तीफे के बाद उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से अयोध्या मंदिर के संचालन पर बड़ा संकट आ गया है. प्रमुख पदाधिकारियों की अनुपस्थिति और अन्य पर संदेह के कारण, मंदिर प्रबंधन को लेकर अनिश्चितता छाई है. एसआईटी जांच और एफआईआर के बाद, यह बड़ा सवाल है कि अब राम मंदिर की व्यवस्था कौन संभालेगा और कैसे राम की मर्यादा कायम रहेगी.

सांकेतिक तस्वीर

चढ़ावा चोरी केस उजागर होने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा तो हो गया, लेकिन अब अयोध्या राम मंदिर के संचालन को लेकर अजीब स्थिति पैदा हो गई है. चूंकि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास बीमार हैं, सबसे बड़े पॉवर सेंटर चंपत राय का इस्तीफा हो चुका है, नंबर दो अनिल मिश्रा भी ट्रस्ट से बाहर हो चुके हैं. अघोषित पॉवर सेंटर रहे टिन्नू यादव अरेस्ट हो चुके हैं. ऐसे में अब सवाल खड़ा हो गया है कि मंदिर प्रबंधन संबंधी फैसले अब कौन लेगा?

बता दें कि राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला गहराने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जांच के लिए SIT गठित किया था. इस एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 8 लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज हो गई. इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा हुआ है. चूंकि यही दोनों लोग ट्रस्ट का सारा काम देखते थे. वहीं अभी तक चंपत राय के बिहाफ पर उनके खासम-खास टिन्नू यादव मंदिर के डे-टू-डे ऑपरेशन का काम संभालते थे. वह चंदा चोरी में जेल जा चुके हैं. वह ट्रस्ट में तीसरे नंबर के पॉवर सेंटर थे.

ऐसे आया आस्था के केंद्र पर संकट

माना जा रहा है कि इन दोनों की अनुपस्थिति में गोपाल राव पर जिम्मेदारी आ सकती है, लेकिन आरोप उनके ऊपर भी हैं. ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी राव की आज ही एक मुस्कुराती हुई तस्वीर तो सामने आई. चूंकि वह खुद संदेह के घेरे में हैं, उनसे लंबी पूछताछ भी हुई है, वह भले ही अभी तक कार्रवाई या इस्तीफ़े के दायरे में नहीं आए हैं. ऐसे में अभी तक यह तय नहीं है कि अब उनकी भूमिका क्या होगी.

क्या कायम रहेगी राम की मर्यादा?

रामायण में प्रसंग है कि एक धोबी के कहने भर से भगवान राम उद्वेलित हो गए थे. उन्होंने माता सीता का त्याग किया था और बनवास भेज दिया था. अब उसी भगवान राम के घर में चंदा चोरी के आरोप लगे हैं. एसआईटी की जांच में इस चंदा चोरी की पुष्टि भी हुई है. इसके बाद एफआईआर दर्ज कर जांच की जिम्मेदारी पुलिस को दे दी गई है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि राम के घर में राम की मर्यादा कायम रह पाएगी? इस सवाल का जवाब आना बाकी है.

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