जिसे आजम ने ‘तनखैया’ कहा था, उसने जौहर यूनिवर्सिटी को क्यों दी राहत? इनसाइड स्टोरी

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान द्वारा स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर फिलहाल बुलडोजर नहीं चलेगा. रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के ध्वस्तीकरण आदेश पर मुरादाबाद मंडल के आयुक्त एवं RDA अध्यक्ष आंजनेय कुमार सिंह ने अंतरिम रोक लगा दी है. यह राहत विश्वविद्यालय प्रशासन की अपील पर मिली है. हालांकि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. अब 3 अगस्त को कमिश्नर की अदालत में दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे. सुनवाई के बाद ही तय होगा कि ध्वस्तीकरण आदेश बरकरार रहेगा या विश्वविद्यालय को आगे कोई राहत मिलेगी.

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय Image Credit: फाइल फोटो

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान द्वारा स्थापित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर फिलहाल बुलडोजर नहीं चलेगा. रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर मुरादाबाद मंडल के आयुक्त और रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष आंजनेय कुमार सिंह ने अंतरिम रोक लगा दी है. यह रोक विश्वविद्यालय प्रशासन की अपील पर लगाई गई है.

हालांकि यह राहत फिलहाल अस्थायी है और मामले की मेरिट पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होने की संभावना है. उसी दिन कमिश्नर की अदालत में इस प्रकरण पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी. ऐसे में जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों का भविष्य अब उसी अफसर की अदालत के अगले आदेश पर निर्भर करेगा, जिसे आजम खान ने कभी ‘तनखैया’ कहकर तंज कसा था.

आखिर क्यों लगी अंतरिम रोक?

मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह केवल मंडलायुक्त ही नहीं, बल्कि रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अध्यक्ष और इस मामले में अपीलीय प्राधिकारी भी हैं. RDA द्वारा 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी होने के बाद जौहर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी आदेश को अपीलीय प्राधिकारी की अदालत में चुनौती दी.

विश्वविद्यालय की ओर से मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की चेयरमैन एवं ट्रस्टी निखत अफलाक खान तथा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एस.एन. सलाम ने अपील दाखिल की. अधिवक्ता जुनैद एजाज ने बताया कि अपील में रामपुर विकास प्राधिकरण, उसके उपाध्यक्ष, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी, क्षेत्र पंचायत सैदनगर के बीडीओ तथा प्रशासक को पक्षकार बनाया गया है.

28 जुलाई को होनी थी सुनवाई, लेकिन बदल गई तारीख

इस मामले में कमिश्नर की अदालत में 28 जुलाई को सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन एक अधिवक्ता के निधन के कारण अगले दिन वकील न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे. इसी को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमिश्नर को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि नियमित सुनवाई होने तक ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी जाए. इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी. अब इस मामले की सुनवाई 3 अगस्त को प्रस्तावित है, क्योंकि उसी दिन रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की अदालत लगती है.

सरकार का पक्ष भी रहेगा मजबूत

मंडल के डीजीसी (राजस्व) दिनेश चौहान ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है. उन्होंने कहा कि अदालत ने अभी तक मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तैयारी के साथ न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगी. सभी आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य और कानूनी तर्क अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे ताकि मामले का निष्पक्ष और कानूनसम्मत निस्तारण हो सके. यानी फिलहाल केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकी गई है, लेकिन आदेश पूरी तरह निरस्त नहीं हुआ है.

RDA ने पहले दिया था 15 दिन का समय

रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई को ध्वस्तीकरण आदेश जारी करते समय विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन की मोहलत दी थी. प्राधिकरण ने कहा था कि इस अवधि के भीतर विश्वविद्यालय स्वयं अपनी अवैध घोषित इमारतों को गिरा दे. यदि ऐसा नहीं किया जाता तो 30 जुलाई के बाद RDA अपने स्तर पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा. इसी बीच विश्वविद्यालय ने अपील दायर कर दी, जिसके बाद ध्वस्तीकरण पर फिलहाल रोक लग गई.

आखिर 38 इमारतें अवैध क्यों घोषित हुईं?

पूरा विवाद भवनों के नक्शों की स्वीकृति को लेकर शुरू हुआ. रामपुर विकास प्राधिकरण को एक शिकायत मिली थी कि विश्वविद्यालय परिसर में बनी कई इमारतों का नक्शा स्वीकृत नहीं है. इसके बाद 28 जून को RDA ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी भवनों के स्वीकृत नक्शों और निर्माण संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा. विश्वविद्यालय ने 8 जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया, लेकिन रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए. व्यक्तिगत सुनवाई के बाद उन्होंने 15 जुलाई को आदेश जारी करते हुए विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित कर दिया और उनके ध्वस्तीकरण के आदेश पारित कर दिए.

विश्वविद्यालय का क्या तर्क है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जब जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, उस समय सींगनखेड़ी गांव रामपुर विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल नहीं था. उस समय यह पूरा क्षेत्र जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता था. ऐसे में विश्वविद्यालय का दावा है कि उस समय RDA से नक्शा स्वीकृत कराने का प्रश्न ही नहीं उठता था.

RDA ने इस दलील पर क्या कहा?

रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय की इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. प्राधिकरण का कहना है कि यदि पूरा क्षेत्र वास्तव में जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में था, तो विश्वविद्यालय परिसर की दो इमारतों के नक्शे जिला पंचायत से स्वीकृत कराए गए थे. ऐसे में सवाल यह है कि बाकी 38 इमारतों के नक्शे जिला पंचायत से क्यों नहीं पास कराए गए? यही वह बिंदु है जिस पर पूरा कानूनी विवाद टिका हुआ है.

मार्च 2026 में RDA सीमा में शामिल हुआ गांव

रामपुर विकास प्राधिकरण ने मार्च 2026 में सींगनखेड़ी गांव को अपनी सीमा में शामिल किया. इससे पहले यह पूरा इलाका जिला पंचायत के अधीन था. यही तथ्य विश्वविद्यालय अपने बचाव में अदालत के सामने रख रहा है. दूसरी ओर RDA का कहना है कि चाहे क्षेत्र जिला पंचायत के अधीन रहा हो, लेकिन निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति लेना आवश्यक था.

100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है मामला

इस पूरे विवाद का आर्थिक पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जानकारों के अनुसार यदि विश्वविद्यालय ने मार्च 2026 से पहले जिला पंचायत से सभी भवनों के नक्शे नियमित करा लिए होते, तो विकास शुल्क अपेक्षाकृत बहुत कम देना पड़ता. जिला पंचायत में विकास शुल्क लगभग 100 से 300 रुपये प्रति वर्गमीटर के बीच था. ऐसी स्थिति में अनुमान है कि विश्वविद्यालय की सभी इमारतों के नक्शे लगभग 5 से 6 करोड़ रुपये के भीतर नियमित हो सकते थे.

लेकिन अब यदि वर्तमान नियमों के तहत इन भवनों को नियमित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो विश्वविद्यालय पर करीब 100 करोड़ रुपये तक का आर्थिक भार आ सकता है. इसमें विकास शुल्क, कंपाउंडिंग फीस, इम्पैक्ट फीस तथा अन्य वैधानिक शुल्क शामिल बताए जा रहे हैं.

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