पहले चारदीवारी, फिर पूरी पानी की टंकी नदी में समाई; बरेली में 3.97 करोड़ की योजना ध्वस्त

बरेली में रिकॉर्ड बारिश ने शहर से गांव तक जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. इस बीच किच्छा नदी के तेज कटान ने 3.97 करोड़ रुपये की योजना को निगल लिया. जल जीवन मिशन के तहत बन रही टंकी नदी में समा गई. जिससे योजना को बड़ा झटका लगा है.

बरेली में ₹3.97 Cr जल जीवन मिशन को झटका

बरेली में लगातार हो रही बारिश और नदियों में बढ़े जलस्तर का असर अब करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाओं पर भी पड़ने लगा है. बरेली के शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बैरमनगर में किच्छा नदी के तेज कटान ने जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकी को अपनी चपेट में ले लिया. करीब 3.97 करोड़ रुपये की योजना पूरी तरह ध्वस्त हो गई.

टंकी के नदी में दफन होने के बाद गांव के लोगों को घर-घर स्वच्छ पानी मिलने की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है. बताया गया कि पिछले सप्ताह किच्छा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था. इसके बाद नदी में तेजी से भू-कटान शुरू हो गया. गुरुवार को ओवरहेड टैंक की सुरक्षा के लिए बनाई गई चारदीवारी भी कटान की चपेट में आ गई और नदी में समा गई.

एक्सईएन और एई ने मौके का किया निरीक्षण

इसके बाद भी नदी का कटान थमा नहीं. पानी के तेज बहाव के साथ धीरे-धीरे कटान टंकी की तरफ बढ़ता गया. आखिरकार निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक भी जमीन छोड़कर नदी में जा गिरा. हालात बिगड़ने की जानकारी मिलने पर एक्सईएन आकांक्षा सिंह, एई संजय सिंह और जेई राकेश चौधरी ने गांव पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया था.

अधिकारियों ने टंकी से जुड़े जरूरी सामान को सुरक्षित कराने की कोशिश की. सोलर पैनल, डीजी, स्कॉडा और जनरेटर समेत अन्य सामान ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरवाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया. हालांकि, लगातार हो रहे कटान के बीच टंकी को नहीं बचाया जा सका.

500 मीटर दूर थी नदी, अब टंकी को ले डूबी

ग्राम प्रधान शमशुल खान के मुताबिक, जब ओवरहेड टैंक बनाने के लिए जगह का चयन किया गया था, तब किच्छा नदी यहां से करीब 500 मीटर दूर थी. पिछले दो-तीन वर्षों में लगातार भू-कटान के कारण नदी धीरे-धीरे टंकी के करीब पहुंच गई. अब नदी और टंकी के बीच करीब 100 मीटर की दूरी रह गई थी. कई बार अधिकारियों को कटान की जानकारी दी गई थी.

गांव वाले टंकी को बचाने के लिए पिचिंग कराने की भी मांग की थी. ग्रामीणों के मुताबिक, समय रहते पिचिंग नहीं कराई गई और कटान लगातार बढ़ता गया. अब इसका खामियाजा करोड़ों रुपये की लागत वाली योजना को भुगतना पड़ा है. गांव में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और करीब 70 फीसदी घरों में टोंटियां भी लगा चुकी हैं.

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें घर पर ही नल से स्वच्छ पानी मिलने लगेगा. लेकिन टंकी नदी में समाने के बाद यह उम्मीद फिलहाल अधर में लटक गई है. मौके पर अब सिर्फ एक कमरा बचा है और उस पर भी नदी के कटान का खतरा बना हुआ है. टंकी के नदी में गिरने का लाइव वीडियो भी सामने आया है.

Follow Us