नरक बन गई डिलीवरी बॉय की जिंदगी…जालसाजों ने गरीब ‘फिरोज’ के पैन कार्ड पर खोल ली 9.5 करोड़ की फर्जी कंपनी

फिरोज अहमद एक गरीब डिलीवरी बॉय हैं. सुबह से शाम तक मेहनत करके परिवार को दो वक्त की रोटी जुटाते हैं. उनकी दुनिया तब हिल गई जब अगस्त 2025 में आयकर विभाग का नोटिस उनके हाथ लगा. नोटिस पढ़कर उनकी आंखें फटी की फटी रह गई. उनके पैन कार्ड पर “WYN IMPEX” नाम की 9.5 करोड़ रुपये की एक फर्म रजिस्टर्ड थी.

डिलीवरी बॉय के पैन कार्ड पर खोल ली 9.5 करोड़ की फर्जी कंपनी

बिजनौर के ग्रामीण इलाकों में दिन भर स्कूटर के जिए सामान पहुंचाने वाला एक साधारण मजदूर जब रात को घर लौटता है तो उसके नाम पर 9.49 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार खड़ा हो चुका होता है. आयकर विभाग उसके दरवाजे पर एक नोटिस चस्पा कर जा चुका होता है. मजदूर इस पूरे घोटाले से पूरी तरह बेखबर है.यह कहानी है धामपुर तहसील के छोटे से गांव पृथ्वीपुर बनवारी के निवासी फिरोज अहमद की.

डिलीवरी बॉय के पैन कार्ड पर खड़ी कर ली 9.5 करोड़ की कंपनी

फिरोज अहमद एक गरीब डिलीवरी बॉय हैं. सुबह से शाम तक मेहनत करके परिवार को दो वक्त की रोटी जुटाते हैं. उनकी दुनिया तब हिल गई जब अगस्त 2025 में आयकर विभाग का नोटिस उनके हाथ लगा. नोटिस पढ़कर उनकी आंखें फटी की फटी रह गई. उनके पैन कार्ड पर “WYN IMPEX” नाम की एक फर्म रजिस्टर्ड थी. इसमें सिर्फ अगस्त 2020 के एक महीने में ही 9.49 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री दिखाई गई थी.

फिरोज हैरान थे. उन्होंने कहा, ‘भाई साहब, मैं तो सिर्फ डिलीवरी करता हूं. दुकान-कारोबार के बारे में तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा. यह सब कैसे हो गया?’. जांच में और भी हैरतअंगेज खुलासा हुआ. फर्म रजिस्ट्रेशन 14 जुलाई 2020 को उनके पैन कार्ड के जरिए कराया गया था. लेकिन रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, दस्तावेज और हस्ताक्षर सब पूरी तरह फर्जी थे. करोड़े के वारे-न्यारे करने वाले किसी गिरोह ने फिरोज की पहचान चुराकर एक पूरा फर्जी साम्राज्य खड़ा कर दिया.

नरक बन गई है फिरोज की जिंदगी

फिरोज ने तुरंत धामपुर पुलिस और जिले के एसपी अभिषेक झा से मिल कर शिकायत दर्ज कराई. लेकिन आज तक न तो पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई की, न ही फर्जी फर्म को रद्द करने की प्रक्रिया तेज हुई. उल्टा, आयकर विभाग के नोटिस लगातार आ रहे हैं. कानूनी चक्कर, मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव ने फिरोज की जिंदगी नरक बना दी है. वे भावुक होकर कहते हैं, कि ‘मैं गरीब आदमी हूं. मेरे पास न पैसे हैं, न ताकत. अगर सरकारी महकमें ने जल्दी मदद नहीं की तो मैं कहां जाऊंगा? मेरी तो पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी.’

अब प्रशासन कह है है जांच कराने की बात

यह मामला केवल फिरोज की व्यक्तिगत मुसीबत नहीं है. यह डिजिटल इंडिया की एक बड़ी चेतावनी है. आज पैन-आधार-जीएसटी जैसी सुविधाएं आम आदमी के लिए आसानी लाई हैं, लेकिन साथ ही पहचान की चोरी (Identity Theft) को भी आसान बना दिया है. बिजनौर जैसे जिलों में फर्जी फर्मों के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां निर्दोष किसान, मजदूर या छोटे लोग फंसाए जा रहे हैं. अब प्रशासन जांच कराने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहा है.

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