UGC नियमों के खिलाफ BJP में इस्तीफों की झड़ी, पूर्व शिक्षा मंत्री ने भी किया बड़ा ऐलान
यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बीजेपी नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री रविंद्र शुक्ला ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके अलावा लखनऊ से भी बीजेपी के 11 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है. नोएडा बीजेपी महानगर उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी यूजीसी के इन नियमों को काला कानून बताते हुए पार्टी को छोड़ दिया है.
यूजीसी के नए कानूनों को लेकर सामान्य वर्ग के विरोध ने जोर पकड़ लिया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉक्टर रवींद्र शुक्ला ने इस कानून के विरोध में भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है. रविंद्र शुक्ला हिंदी साहित्य अंतर्राष्ट्रीय के भारतीय अध्यक्ष भी हैं
लखनऊ में बीजेपी के 11 पदाधिकारियों ने किया रिजाइन
यूजीसी के इस Equity Rule के विरोध में लखनऊ से भी 11 इस्तीफे की खबर है. यहां के बख्शी तालाब के कुम्हारवां मंडल महामंत्री आलोक तिवारी के साथ 11 और पदाधिकारियों ने भी अपने-अपने पद से रिजाइन कर दिया है. इन 11 इस्तीफों को लेकर एक लेटर वायरल हो रहा है. इसमें लिखा गया है कि यह कानून लागू करके हमारे सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
नोएडा बीजेपी में भी इस्तीफा
नोएडा बीजेपी महानगर उपाध्यक्ष राजू पंडित ने यूजीसी के इन नियमों को काला कानून बताते हुए इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है. इसमें उन्होंने लिखा है कि वे सरकार के इस नए यूजीसी नियम से सहमत नहीं है.
राजू पंडित ने कहा कि वह जिस उद्देश्य से वह राजनीति में आए थे वह उद्देश्य समाज और युवाओं को जोड़ने और आगे बढ़ने का था. लेकिन यूजीसी का नियम समाज को बाटने का काम कर रहा है. इस नए नियम के तहत सामान्य और स्वर्ण वर्ग के बच्चों को पीछे धकेला जा रहा है.
त्रावस्ती बीजेपी शिक्षक प्रकोष्ठ में 2 इस्तीफे
त्रावास्ती से भी यूजीसी के नए कानून के विरोध में बीजेपी के अंदर 2 इस्तीफे सामने आए हैं. बीजेपी शिक्षक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक ने अपना इस्तीफा पार्टी को भेज दिया है. इसके अलावा दिनेश मिश्र ने भी क्षेत्रीय सह संयोजक शिक्षक प्रकोष्ठ भाजपा अवध क्षेत्र के पद से इस्तीफा दे दिया है.
यूजीसी के इस नियम में क्या है?
यूजीसी ने 13 जनवरी को एक Equity Rule लागू किया है. इस नियम के तहत शैक्षणिक संस्थानों में एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए परिसर में 24×7 हेल्पलाइन, Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा.
यूजीसी के नए नियम का इसलिए हो रहा विरोध
यूजीसी के Equity Rule को लेकर सामान्य वर्ग का कहना है कि यह इस नियम के सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. उन्होंने आशंका जताई कि जब इस नियम में झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है तो उनपर बिना किसी सबूत के झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं. इससे सामान्य छात्रों करियर खराब हो सकता है.
