‘मैं इनका भी बाप…’ व्यास पीठ से रितेश्वर महाराज ने कह दी ऐसी बात, भावुक होगए बृजभूषण शरण सिंह

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह कथावाचक रितेश्वर महाराज के सामने भावुक हो गए. महाराज ने खुद को बृजभूषण से भी बड़ा बाहुबली बताते हुए कहा, 'इनका भी बाप मैं हूं.' यह सुनकर बृजभूषण ने उनका आभार जताया. रितेश्वर महाराज अपनी कथाएं निःशुल्क करने और राष्ट्र एकता को बढ़ावा देने का दावा करते हैं, जो सनातन धर्म के लिए समर्पित हैं.

बृजभूषण शरण सिंह ने कराया राष्ट्र कथा

बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की क्षवि बाहुबली की है, लेकिन कथा वाचक रितेश्वर महाराज ने खुद को उनका भी बाप बता दिया. रितेश्वर महाराज ने यह बात खुद बृजभूषण शरण सिंह के सामने और उनके ही कैंपस में कहा. यह सुनने के बाद बृजभूषण शरण सिंह क्रोध करने के बजाय भावुक हो गए. उन्होंने अपने आंसू पोछे और रितेश्वर महाराज का अभिवादन कर इस कृपा के लिए उनका आभार जताया. यह घटनाक्रम पूर्व सांसद नंदिनी निकेतन में आयोजित 8 दिवसीय राष्ट्रकथा के दौरान की है.

व्यासपीठ पर बैठे रितेश्वर महाराज कथा सुनाते समय बृजभूषण शरण सिंह की तरफ इशारा किए और श्रोताओं से कहा कि अगर आप समझते हो कि भारत में, उत्तर प्रदेश में और गोंडा में इनका दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा तो यहां पर इनका भी बाप (खुद की ओर इशारा करते हुए) बैठा है. उन्होंने कहा कि इसका भी दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा. रितेश्वर महाराज के मुंह से अपने लिए ऐसे शब्द सुनकर भी पूर्व सांसद ने हाथ जोड़ लिया, भावुक हो गए और आंसू पोछते हुए उनका अभिवादन किया.

निशुल्क कथा का दावा

इस दौरान मंच से रितेश्वर महाराज ने चैलेंज करते हुए कहा कि कोई यह साबित कर दे कि उन्हें कथा के लिए पैसे दिए हैं. उन्होंने कहा कि आज तक भारतवर्ष की इस भूमि पर भगवान के अलावा किसी से कुछ भी स्वीकार नहीं किया. वह अनवरत मां भारती के लिए, राम के लिए, भगवान कृष्ण के लिए, प्रभु हनुमान के लिए कथा करते हैं और उनका गुणगान करते हुए सनातन को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज उनकी उम्र 52 वर्ष हो चुकी है, लेकिन दुनिया में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जो कह सके कि उन्हें कथा करने के लिए पैसे दिए हैं.

ये है कथा का उद्देश्य

रितेश्वर महाराज ने कथा के दौरान इसका उद्देश्य बताया. कहा कि कथा का उद्देश्य राष्ट्र की एकता और अखंडता के साथ मानव की परमात्मा से मिलन है. उन्होंने कहा कि कथा का अधिकार भी उसी व्यक्ति को है, जिसने भगवान राम पर और इस राष्ट्र पर अपनी जवानी न्यौछावर कर दी हो. वह देश की एकता और अखंडता के लिए जीवन समर्पित कर सकता हो. उन्होंने कहा कि उनका भी जीवन कैसे चल रहा है, उन्हें खुद नहीं पता. भगवान ही चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरयू के पावन तट पर कथा कहने का सौभाग्य उन्हें मिला है. इसलिए वह खुद को सौभाग्यशाली समझते हैं.