15 की उम्र में उठा ले गए थे डकैत, वहीं बीती जिंदगी; 65 साल बाद घर लौटी मिठनी की कहानी
मिठनी की अविश्वसनीय कहानी! 15 साल की उम्र में हरदोई में डकैतों द्वारा अपहृत मिठनी, 65 साल बाद 80 वर्ष की आयु में अपने मायके लौटीं. उसे अलीगढ़ में पहलवान सोहनलाल यादव ने डकैतों से छुड़ाया, लेकिन वह खुद मिठनी की सूरत पर मोहित हो गए और उससे शादी कर ली. आज मिठनी के आठ बच्चे हैं.
उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक ऐसी घटना हुई है, जिसे जानकर और सुनकर हर कोई हैरान है. यहां 65 साल पहले अगवा हुई मिठनी अपने जीवन के आखिरी पलों में घर लौट आई है. 15 साल की उम्र में उसकी शादी हुई थी, उसी समय उसके ससुराल में डकैती पड़ी और माल असबाब के साथ डकैत उसे भी उठा ले गए थे. आज 65 साल बाद अपने मायके लौटी मिठनी 80 साल की है. मिठनी कहती है कि इन 65 सालों में उसने हर पल अपने मायके को याद किया है. पेश है उसी मिठनी की पूरी कहानी, आप भी पढ़िए.
यह कहानी भले ही आपको फिल्मी स्क्रिप्ट लग सकती है, लेकिन यह हरदोई के बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र में टोलवा आट गांव की यह सच्ची कहानी है. यहां गांव के बाहर तीन चार मकानों का एक पुरवा था. इसी में एक सख्श बलदेव रहते थे. साल 1961 -62 में डकैतों ने यहां डकैती डाली, और जिस घर से जो कुछ मिला, सब समेट लिया था. चूंकि यहां माल असबाब ज्यादा नहीं मिला था, इसलिए डकैतों ने बलदेव और उनके बेटे शिवलाल पर खंजर से वार कर घायल कर दिया और उनके घर में मौजूद लड़की मिठनी (15) को अपने साथ ले कर चले गए थे.
गौने से पहले हो गई थी अगवा
इस घटना से कुछ दिन पहले ही मिठनी का ब्याह सुरसा थाना क्षेत्र के पुनुआवर गांव में हुआ था. अगले महीने ही उसका गौना होना था. वह अपने पति के ख्वाबों में खाई ही थी कि इस वारदात के दौरान गिरोह के सरदार की नजर पड़ गई. डकैतों के चंगुल में कुछ दिनों तो मिठनी खूब छटपटाती रही, लेकिन बाद में उसने इसे ही अपना तकदीर मान लिया. इधर, डकैतों का गिरोह उसे लेकर जंगल-जंगल घूमता रहा. कई बार उसकी पिटाई भी की और फिर बाद में उसे अलीगढ़ में किसी व्यक्ति को सौंप दिया.
डकैतों से छुड़ाकर पहलवान ने की शादी
यह खबर अलीगढ़ के ही दादों थाना क्षेत्र में समेघा गांव के रहने वाले पहलवान सोहनलाल यादव को मिली तो उन्होंने अपने साथियों के साथ डकैतों के अड्डे पर धावा बोलकर मिठनी को छुड़ा लिया. चूंकि मिठनी देखने में सुंदर तो थी ही, इसलिए सोहनलाल का भी उसके ऊपर दिल आ गया और उन्होंने मिठनी से ब्याह कर लिया. इसके बाद दोनों के आठ बच्चे हुए. इइनमें पांच बेटियां और तीन बेटे हैं. मिठनी कहती हैं कि डकैतों से आजाद होकर वह सोहनलाल के साथ अपना जीवन गुजार रही थी, लेकिन अक्सर वह अपने मायके की यादों में खो जाती थी.
बच्चों को सुनाती थी डकैती की कहानी
मिठनी के मुताबिक वह अपने घर में बच्चों को डकैती और अपने अपहरण की कहानी सुनाती थी. अपने पिता और भाई को लेकर चिंता भी जताती थी, लेकिन उसे पता नहीं था कि घर में कोई बचा भी है या नहीं. दरअसल उसने अपने पिता और भाई पर जानलेवा हमला होते अपनी आंखों से देखा था. वह अक्सर कहती थी कि हरदोई जिले में उसका घर है. जहां बड़ा शिव मंदिर है. उसे अपने पिता और भाइयों शिवलाल और सूबेदार के नाम भी याद थे. मिठनी की सबसे छोटी बेटी सीमा यादव जो नोएडा में रहती थी, उससे मां का लगाव बहुत था. करीब अस्सी वर्ष की मां मिठनी देवी जब उससे अपने मायके के बारे में बता कर याद करती तो उनकी छोटी बेटी ने ठान लिया कि वह अपनी मां को लेकर हरदोई जरूर जाएगी.
ऐसे पहुंची मायके
बेटी सीमा के साथ मिठनी शुक्रवार को अलीगढ़ से हरदोई पहुंची. स्टेशन पर उतर कर उसने सकाहा के शिव मंदिर जाने का रास्ता पूछा और फिर ऑटो से सकाहा शिव मंदिर पहुंच गयी. इस मंदिर को देखते ही मिठनी की पुरानी यादें ताजा हो गईं. उसे रास्ते की थोड़ी थोड़ी पहचान हो गई. इसके बाद गांव के लोगों से अपने भाई शिवलाल और सूबेदार के बारे में पूछा. पता चला कि दोनों की मौत हो चुकी है और उनके परिवार के लोग गांव में रहते है. इसके बाद पूछते-पूछते मिठनी भाई शिवलाल के मकान पर पहुंची और शिवलाल की बहू को अपना परिचय दिया.
फिर ऐसे हुआ ननद भौजाई का मिलाप
चूंकि शिवलाल के घर में डकैती और मिठनी के अगवा होने की कहानी सबको मालूम थी. इसलिए घर वालों ने मिठनी का स्वागत किया और उसे बड़े से घर घर के अंदर ले गए. यह खबर कुछ ही देर में चारो ओर फैल गई. इसके बाद घर में रिश्तेदारों का मजमा लग गया. फिलहाल मिठनी की बेटी सीमा को इस बात की ख़ुशी है कि उम्र के आखरी पड़ाव में उसने अपनी मां को मायके पहुंचा ही दिया. मायके वालों से मिलने के बाद आज मिठनी वापस अपने घर लौट गई है.
