IIT टॉपर से रिश्वतखोरी तक! सोलर प्रोजेक्ट में 5% कमीशन मांगने का आरोप, IAS अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ीं
IAS अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. उनपर सोलर प्रोजेक्ट के नाम पर 5 प्रतिशत की कमीशन खोरी का आरोप लगा है. इस मामले को लेकर 20 मार्च 2025 को पहली एफआईआर दर्ज हुई थी. अब इसको लेकर सरकार ने IAS अभिषेक प्रकाश को अधिकारिक चार्जशीट थमा दी है.
उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश पर घूसखोरी के गंभीर आरोपों में शिकंजा और कसता जा रहा है. योगी सरकार ने उन्हें आधिकारिक रूप से चार्जशीट थमा दी है. उनपर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ रहते हुए सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में रिश्वतखोरी का आरोप लगा है.
जांच के अनुसार, एसएईएल सोलर (SAEL Solar P6 Pvt Ltd) जैसी कंपनी ने उत्तर प्रदेश में सोलर एनर्जी से जुड़े उपकरणों (कलपुर्जों) का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से आवेदन किया था. प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 7,000-8,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. कंपनी के प्रतिनिधि विश्वजीत दास ने शिकायत की कि अभिषेक प्रकाश (तत्कालीन सीईओ) ने उन्हें संपर्क करने के लिए निकांत जैन नामक व्यक्ति का नंबर दिया.
कंपनी के प्रतिनिधि ने शिकायत में आगे कहा कि निकांत जैन ने प्रोजेक्ट की मंजूरी, सब्सिडी और हाई-पावर्ड कमिटी से अनुमोदन के बदले कुल लागत का 5% कमीशन मांगा. रिश्वत देने से इनकार करने पर फाइल रोक दी गई और धमकियां दी गईं.
20 मार्च 2025 को दर्ज हुई थी एफआईआर
बता दें कि इस मामले में 20 मार्च 2025 को गोमतीनगर थाने में विश्वजीत दास की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई. शुरू में निकांत जैन को मुख्य आरोपी बनाया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिकायत मिलते ही प्रारंभिक जांच कराई. आरोप सही पाए जाने पर अभिषेक प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
निकांत जैन को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया
इस मामले को लेकर एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की गई. इसने1600 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की. चार्जशीट में निकांत जैन को मुख्य आरोपी बनाया गया. जांच में अभिषेक प्रकाश की भूमिका उजागर हुई. विश्वजीत दास के एफिडेविट और बयान में भी साफ तौर पर अभिषेक प्रकाश का नाम लिया गया. व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य डिजिटल सबूतों से दोनों के बीच संपर्क की पुष्टि हुई.
निकांत जैन ने पूछताछ में कबूल किया है कि अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर ही उन्होंने रिश्वत मांगी थी. नियुक्ति विभाग ने अभिषेक प्रकाश को चार्जशीट थमाई है. उनसे 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है. एसआईटी ने उनके बयान दर्ज करने के लिए शासन से अनुमति भी मांगी है. अनुमति मिलते ही पूछताछ होगी.
अभिषेक प्रकाश कौन हैं?
- 2006 बैच के आईएएस अधिकारी, मूल रूप से बिहार के निवासी.
- आईआईटी ग्रेजुएट, यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 8.
- लखनऊ, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में डीएम रह चुके हैं.
- एलडीए वीसी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम किया.
- इन्वेस्ट यूपी के सीईओ के रूप में निवेश आकर्षण में अहम भूमिका निभाई, लेकिन अब भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे.
मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की पड़ताल हो रही है
योगी सरकार ने बार-बार “जीरो टॉलरेंस” नीति पर जोर दिया है. पिछले वर्षों में कई आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है. इस मामले में ईडी ने भी जांच शुरू की है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की पड़ताल हो रही है. फिलहाल, अभिषेक प्रकाश बड़ी मुश्किल में फंसते हुए नजर आ रहे हैं.
