अब फोटो देखकर पता चलेगी गाय की नस्ल! IVRI ने तैयार किया AI प्लेटफॉर्म

अब गाय की नस्ल पहचानने के लिए अनुभव या अनुमान की जरूरत नहीं होगी. बरेली स्थित आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो सिर्फ एक फोटो देखकर गाय की नस्ल की पहचान कर सकता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक 99 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ देसी नस्लों की पहचान करने में सक्षम है.

एक फोटो देखकर गाय की नस्ल की पहचान कर सकता है ये AI प्लेटफॉर्म

अब गाय की नस्ल पहचानने के लिए वर्षों के अनुभव या अनुमान पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी. बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो सिर्फ एक फोटो देखकर गाय की नस्ल की पहचान कर सकता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक देसी गायों की नस्ल पहचानने में 99 प्रतिशत से अधिक सटीक परिणाम देने में सक्षम है.

यह तकनीक पशुपालकों, शोधकर्ताओं और पशुधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है. अक्सर पशुपालकों को अपनी गाय की वास्तविक नस्ल को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है, जिससे नस्ल संरक्षण, रिकॉर्ड तैयार करने और प्रजनन प्रबंधन में दिक्कतें आती हैं. ऐसे में आईवीआरआई का यह एआई प्लेटफॉर्म पशुपालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है.

चेहरे और शरीर की तस्वीर से होगी पहचान

आईवीआरआई के लाइवस्टॉक प्रोडक्ट्स टेक्नोलॉजी डिवीजन के वैज्ञानिकों की टीम ने मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल कर यह मॉडल तैयार किया है. यह प्लेटफॉर्म गाय के चेहरे और शरीर की तस्वीरों का विश्लेषण करता है और उसके आधार पर संबंधित नस्ल की पहचान करता है. तकनीक की खास बात यह है कि यह केवल नस्ल का नाम ही नहीं बताएगी, बल्कि यह भी बताएगी कि किन विशेष शारीरिक विशेषताओं के आधार पर यह पहचान की गई है.

फिलहाल छह देसी नस्लें शामिल

वैज्ञानिकों ने शुरुआत में देश की छह प्रमुख देसी नस्लों को इस प्लेटफॉर्म में शामिल किया है। इनमें शामिल हैं— गिर, साहीवाल, थारपारकर, कांकरेज, हरियाणा और वृंदावनी. इन नस्लों की पहचान के लिए हजारों तस्वीरें देश के विभिन्न राज्यों के फार्म, अनुसंधान संस्थानों और पशुधन केंद्रों से जुटाई गईं. इसके बाद एआई मॉडल को अलग-अलग परिस्थितियों, कोणों और प्रकाश व्यवस्था में तस्वीरों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया.

चार महीने में तैयार हुआ मॉडल

आईवीआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्लेटफॉर्म को विकसित करने में लगभग चार महीने का समय लगा. इस दौरान डेटा संग्रह, फोटो एनोटेशन, मशीन लर्निंग मॉडल की ट्रेनिंग और उसके परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई. अभी इस प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक सर्वर पर लॉन्च नहीं किया गया है, लेकिन भविष्य में इसे आम लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है. वैज्ञानिकों की योजना इस तकनीक को मोबाइल ऐप के रूप में विकसित करने की भी है.

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