ऑनलाइन गेमिंग में 5 हजार हारने पर घर से भागा बच्चा, परिवार परेशान

कानपुर के काकादेव की पुरानी बस्ती का 13 वर्षीय किशोर, जो आठवीं कक्षा का छात्र है, मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने का आदी हो गया था. धीरे-धीरे उसे गेमिंग के साथ-साथ सट्टेबाजी (बेटिंग) की भी लत लग गई. किशोर चोरी-छिपे अपनी मां के बैंक खाते का उपयोग गेम में पैसे लगाने के लिए करता था.जब मां को ये बात पता चली तो किशोर डांट के डर से घर छोड़कर चला गया.

ऑनलाइन गेमिंग में 5 हजार हारने पर घर छोड़ भागा 13 साल का किशोर ( प्रतीकात्मक तस्वीर)

डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन गेमिंग की लत किशोरों के लिए किस कदर खतरनाक साबित हो रही है, इसका एक ताजा मामला काकादेव क्षेत्र में सामने आया है. यहां एक 13 वर्षीय छात्र ऑनलाइन गेम में 5 हजार रुपये हारने के बाद परिजनों की डांट के डर से घर छोड़कर चला गया. घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी किशोर का कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे परिजन गहरे सदमे में हैं.

छात्र को गेमिंग के साथ-साथ सट्टेबाजी लग गई थी लत

काकादेव की पुरानी बस्ती निवासी एक युवक का 13 वर्षीय बेटा, जो आठवीं कक्षा का छात्र है, मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने का आदी हो गया था. धीरे-धीरे उसे गेमिंग के साथ-साथ सट्टेबाजी (बेटिंग) की भी लत लग गई. किशोर चोरी-छिपे अपनी मां के बैंक खाते का उपयोग गेम में पैसे लगाने के लिए करता था.

डांट के डर से घर छोड़ गया किशोर

​मामले का खुलासा 28 अप्रैल को हुआ, जब बैंक से मां के पास ट्रांजेक्शन के संबंध में फोन आया. जांच करने पर पता चला कि किशोर गेमिंग में करीब 5 हजार रुपये हार चुका है. जैसे ही किशोर को पता चला कि मां बैंक गई है और उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी है, वह डांट के डर से घर से निकल गया. देर रात तक जब वह वापस नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला.

​परिजनों की तहरीर पर काकादेव थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है. पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच में मामला गेमिंग में पैसे हारने और डर के कारण घर छोड़ने का लग रहा है. पुलिस की टीमें किशोर की तलाश में जुटी हैं और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है.

अभिभावकों है ये सलाह

​इस घटना ने अभिभावकों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है. मनोचिकित्सकों और साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को इस दलदल से निकालने के लिए बहुत जरूरी है कि कुछ बताओं का विशेष ध्यान रखा जाए. बच्चों के फोन से सभी पेमेंट ऐप्स, UPI और नेट बैंकिंग विवरण हटा दें. बैंक खातों के एसएमएस अलर्ट सक्रिय रखें ताकि हर ट्रांजेक्शन की जानकारी तुरंत मिल सके. डिजिटल भुगतान करते समय बच्चों को अकेला न छोड़ें और उनके ब्राउजिंग इतिहास पर नजर रखें.

मोबाइल के बजाय बच्चों को शारीरिक खेल (आउटडोर गेम्स), पेंटिंग, संगीत या किताबों की ओर प्रेरित करें. रात में सोते समय बच्चों को फोन से दूर रखें और स्क्रीन टाइमिंग निर्धारित करें. अभिभावक खुद मोबाइल का सीमित उपयोग करें, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने बड़ों को करते देखते हैं. ऑनलाइन गेमिंग केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि अब किशोरों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है. समय रहते संवाद और नियंत्रण ही एकमात्र बचाव है.

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