कानपुर में 125 करोड़ के साइबर फ्रॉड साम्राज्य का अंत, बैंक कर्मियों की मिलीभगत से चल रहा था ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल

कानपुर डिजिटल स्कैम Image Credit:

कानपुर पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर देशभर के लोगों से लगभग 125 करोड़ रुपये ठग लिए. पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इस पूरे खेल में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इसमें कई प्रतिष्ठित बैंकों के कर्मचारी भी शामिल थे, जो कमीशन के लालच में फर्जी अकाउंट्स संचालित करवा रहे थे.

पुलिस आयुक्त द्वारा अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के दौरान थाना बर्रा पुलिस को सटीक सूचना मिली कि एच ब्लॉक पेट्रोल पंप के पास प्राइमरी स्कूल के निकट कुछ संदिग्ध व्यक्ति किसी बड़ी वारदात की फिराक में हैं. पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी कर मौके से तीन संदिग्धों को पकड़ा. जब उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो साइबर फ्रॉड की ऐसी परतें खुलीं कि अधिकारी भी दंग रह गए. इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गैंग के कुल 8 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया.

गिरोह 4 चरणों में ठगी को अंजाम देता है

पकड़े गए आरोपियों की पहचान सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, साहिल विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, तनिष गुप्ता, अमित सिंह, अमित कुमार और आशीष कुमार के रूप में हुई है. पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह चार चरणों में अपनी ठगी को अंजाम देता था और लोगों से लाखों रुपये ऐंठता था.

बैंकों में सेंध

आरोपी यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, एक्सिस बैंक और यूको बैंक जैसे संस्थानों के भ्रष्ट कर्मचारियों को 5 से 10 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर अपने साथ मिलाते थे. बैंक कर्मियों की मदद से फर्जी दस्तावेजों और फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन पर ऐसे ​फर्जी ट्रस्ट और करंट अकाउंट, जिनमें लेन-देन की कोई सीमा (Limit) नहीं होती थी.

डिजिटल अरेस्ट का डर

गिरोह लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ या ऊंचे रिटर्न वाले इन्वेस्टमेंट का झांसा देकर इन खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवाता था. जैसे ही किसी खाते की शिकायत साइबर सेल में होती, बैंक के अंदर मौजूद साथी तुरंत पूरी रकम निकाल लेते और खाता बंद करवा देते थे, जिससे पुलिस को ‘मनी ट्रेल’ नहीं मिल पाती थी.

​प्रारंभिक जांच में पुलिस को दो मुख्य खातों से 53 करोड़ और 66 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिले हैं. इसके अलावा एक अन्य खाते से 5 करोड़ का ट्रांजेक्शन पाया गया है. नवी मुंबई के एक मामले में भी इसी गैंग द्वारा 58 करोड़ रुपये की ठगी का लिंक मिला है.

बैंक अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए. इसमें ठगी के डेटा और बैंक कर्मियों से बातचीत के प्रमाण मौजूद हैं. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि मामले में संलिप्त बैंक अधिकारियों के विरुद्ध भी कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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