मेडिकल स्टूडेंट्स को नहीं होगी डेड बॉडी की ज़रूरत, AI समझाएगा मानव शरीर की संरचना
अब तक मेडिकल स्टूडेंट्स को मानव शरीर की संरचना समझने के लिए डेड बॉडी की जरूरत होती थी लेकिन अब AI के चलते ये जरूरत खत्म होने वाली है. कानपुर का GSVM मेडिकल कॉलेज, AI सॉफ्टवेयर्स के जरिए ये पहल करने जा रहा है.

मानव शरीर की संरचना समझने के लिए मेडिकल स्टूडेंट्स को डेड बॉडी की खासा जरुरत होती है. ह्यूमन बॉडी को समझने के लिए ट्रेनी डॉक्टर्स को डेड बॉडी मुहैया कराई जाती है, जिसके जरिए वे मेडिकल की पढ़ाई कर पाते हैं. कई बार डेड बॉडीज की कमी के चलते उन्हें परेशानी का सामना भी करना पड़ता है और वे सही तरीके से प्रैक्टिकल्स नहीं कर पाते.
GSVM मेडिकल कॉलेज की पहल
अब उनकी ये जरूरत बहुत जल्द खत्म होने वाली है. मेडिकल एजुकेशन की फील्ड में कानपुर का GSVM मेडिकल कॉलेज अब एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. अब यहां स्टूडेंस्ट्स की पढ़ाई को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी है. कॉलेज प्रशासन AI की मदद से ऐसे 3 सॉफ्टवेयर और वर्चुअल कंप्यूटराइज्ड डिसीजन टेबल खरीदने जा रहा है.
जिनकी मदद से मेडिकल एजुकेशन में काफी बदलाव होने वाला है. कॉलेज मैनेजमेंट का कहना है कि GSVM इस टेक्नॉलाजी को अपनाने वाला प्रदेश का चुनिंदा मेडिकल कॉलेज होगा.

3D मॉडल से लर्निंग होगी आसान
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि इन अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर्स के आने से मेडिकल शिक्षा को एक नई दिशा मिलेगी. छात्र-छात्राएं अब हर लेक्चर न केवल डिजिटली पढ़ पाएंगे बल्कि एनाटॉमी जैसे कठिन विषयों को समझना बेहद आसान हो जाएगा. उनका कहना है कि इसमें शरीर की संरचना को 2D और 3D मॉडल के जरिए समझने में आसानी होगी. अब तक छात्रों को एनाटॉमी समझने के लिए कैडेवर (मृत देह) पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
AI होगी मददगार
प्रो. काला ने बताया कि अभी तक एक डेड बॉडी की मदद से 10 से 15 छात्रों को एक साथ पढ़ाया जाता है. नई तकनीक के आ जाने से छात्रों को कई एंगल्स से इंटरनल स्ट्रक्चर समझने में आसानी होने वाली है. डिजिटल मॉडल की मदद से कठिन लेक्चर्स को फोटो, वीडियो और ग्राफिक्स के जरिए सरल तरीके से समझाया जाएगा. इसके साथ ही इन सॉफ्टवेयरों को देश के किसी भी कोने से ऑनलाइन जोड़कर पढ़ाई कराना भी संभव हो पाएगा.