गंगा एक्सप्रेस-वे पर 27 साल तक टोल टैक्स वसूलेगी कंपनियां, 15 दिन फ्री के नुकसान की भरपाई ऐसे होगी

गंगा एक्सप्रेसवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत डीबीएफओटी (टोल) मॉडल पर विकसित किया गया है. इसके तहत कन्सेशनैयर्स को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है. साथ ही 15 दिन की टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार और यूपीडा द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी.

गंगा एक्सप्रेसवे

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेसवे को कमर्शियल ऑपरेशन डेट (सीओडी) से 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने का ऐलान किया है. यानी कि अब यात्री 15 दिनों तक इस नए-नवेले एक्सप्रेस-वे पर बिना टोल टैक्स चुकाए फर्राटा भर सकेंगे. परियोजना के कन्सेशनैयर्स आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर और अदानी इन्फ्रास्ट्रक्चर को 15 दिनों तक टोल कलेक्शन स्थगित रखने को कहा गया है. यूपीडा के आदेश के मुताबिक इस अवधि में यात्रियों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा.

जनता को ‘फ्री राइड एक्सपीरियंस’

यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब इंडिपेंडेंट इंजीनियर द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के अनुच्छेद 14.3.1 के तहत प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किया गया. इससे एक्सप्रेसवे की कमर्शियल ऑपरेशन डेट निर्धारित हो गई है. इसके साथ ही एक्सप्रेसवे आम जनता के उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार माना गया. योगी सरकार का उद्देश्य है कि शुरुआती चरण में अधिक से अधिक लोग इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे का अनुभव कर सकें.

27 साल का कंसेशन पीरियड

गंगा एक्सप्रेसवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत डीबीएफओटी (टोल) मॉडल पर विकसित किया गया है. इसके तहत कन्सेशनैयर्स को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है. हालांकि, 15 दिन की इस टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार अथवा यूपीडा द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी.

मेंटेनेंस को लेकर है ये निर्देश

यूपीडा ने स्पष्ट किया है कि टोल-फ्री अवधि के दौरान भी ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस से संबंधित सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा. अनुच्छेद 17 सहित कंसेशन एग्रीमेंट के अन्य प्रावधानों के तहत सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी.

विकास, कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

मेरठ से प्रयागराज तक फैला गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है. इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. 15 दिन की यह टोल छूट न केवल आमजन को राहत देगी, बल्कि इस मेगा प्रोजेक्ट के प्रति सकारात्मक माहौल भी तैयार करेगी. इस फैसले को प्रदेश सरकार की ‘जनहित प्रथम’ नीति के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ नागरिकों को ‘फील गुड’ कराने को भी प्राथमिकता देती है.

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