KGMU कैसे बना धर्मांतरण का अड्डा? STF की जांच में बड़ा खुलासा, सामने आए 12 मामले

लखनऊ के केजीएमयू में धर्मांतरण रैकेट का एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है. यहां सुनियोजित तरीके से हिंदू महिला स्टाफ व डॉक्टरों को फंसाकर शारीरिक शोषण कर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा था. एसटीएफ की विस्तृत जांच में 12 ऐसे मामले सामने आए हैं.

KGMU यौन शोषण, धर्मांतरण मामले की जांच Image Credit:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का केजीएमयू धर्मांतरण का अड्डा बन गया था. यहां लंब समय से और सुनियोजित तरीके से धर्म परिवर्तन का खेल चल रहा था. इस खेल को एक रैकेट के रूप में अंजाम दिया जा रहा था. यह खुलासा यूपी एसटीएफ ने करीब 10 महीने तक चली जांच के बाद किया है. रैकेट का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने कई महत्वपूर्ण सबूत भी पेश किए हैं.

पिछले दिनों महिला डॉक्टर के धर्मांतरण की कोशिश का मामला सामने आने के बाद यूपी एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू की थी. इस जांच में अब एसटीएफ ने दावा किया है कि यह कोई पहला मामला नहीं था, बल्कि केजीएमयू में यह धर्मांतरण का खेल कई साल से और कई विभागों में चल रहा था. इसमें हिंदू महिला डॉक्टर और स्टाफ को योजनाबद्ध तरीके से जाल में फंसाकर शोषण और किया जाता था. फिर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता था.

इन विभागों में चल रहा था खेल

यूपी एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अभी तक की जांच में केजीएमयू के चार वार्डों में धर्मांतरण की पुष्टि हुई है. इसमें गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, पैथोलॉजी विभाग और रेडियोलॉजी विभाग शामिल है. इन विभागों में हिंदू महिला डॉक्टर या महिला स्टॉफ को जाल में फंसाकर शारीरिक शोषण करने और बाद में दबाव बनाकन उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के 12 मामले सामने आए हैं. आशंका ळै कि इस तरह के कुछ और मामले भी भविष्य में सामने आ सकते हैं.

शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई

एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक पीड़ितों ने उचित मंच पर शिकायत भी दी, लेकिन केजीएमयू में बैठे विभिन्न विभागाध्यक्षों ने जान बूझकर इस शिकायतों को अनसुना किया. एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग के HOD डॉ. सुरेश बाबू, additinal HOD डॉ सुमायरा कय्यूम के साथ बायोकेमेस्ट्री के लैब इंचार्ज डॉ. वाहिद अली ने कट्टरपंथी सोच और शोषण की शिकार हिंदू महिला डॉ. और स्टाफ की शिकायतों को दबाने की कोशिश की.

12 आरोपी चिन्हित

एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े 13 लोगों को चिन्हित किया है. इनमें पांच आरोपी ऐसे हैं, जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप में शोषण किया और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया. इनमें डॉ. रमीज (रमीजउद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक) सीनियर रेजिडेंट, पैथोलॉजी का नाम टॉप है. डॉ. रमीज ने हिंदू महिला डॉक्टरों जैसे डॉ. कृतिका, डॉ. मुस्कान को शिकार बनाया. इसके अलावा गांधी वार्ड में नर्सिंग स्टॉफ नाफिस ने नर्सिंग कर्मी ज्योति सिंह को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक/मानसिक शोषण किया. बाद में धर्मांतरण कराकर निकाह किया.

इन तीनों पर भी हैं आरोप

गांधी वार्ड में ही नर्सिंग स्टॉफ फुरकान भी है, जिसने नर्सिंग कर्मी जागृति गुप्ता को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक व मानसिक शोषण किया और निकाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. इसी प्रकार गांधी वार्ड में रेजिडेंट डॉ. आदिल ने नर्सिंग स्टाफ माविया और मीनाक्षी पाण्डेय को शादी का शोषण किया. वहीं माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संविदा कर्मी शफात अली खान ने 25 वर्षीय हिंदू कंप्यूटर ऑपरेटर युवती का शोषण किया.

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