UP में अब झुग्गी-झोपड़ी वालों को मिलेंगे फ्लैट, 10 साल तक नहीं बेच सकेंगे, जानें योगी सरकार का पूरा प्लान
योगी सरकार ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को फ्लैट देने का फैसला किया है. ये फ्लैट लीज पर रहेंगे. इन्हें 10 साल तक बेचा-खरीदा नहीं जा सकेगा. 10 वर्ष बाद इन्हें फ्रीहोल्ड कर इन फ्लैट्स को आवंटियों के नाम रजिस्ट्री कर दी जाएगी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना के तहत झुग्गी-झोपड़ी वालों को बड़ी राहत दी है. अब इन बस्तियों में रहने वाले परिवारों को उसी जगह पर 30 वर्गमीटर के बहुमंजिला फ्लैट दिए जाएंगे. लखनऊ और सहारनपुर की दो बस्तियों का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर लिया गया है. वहीं, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, मेरठ, प्रयागराज, शाहजहांपुर और वाराणसी समेत कई शहरों में सर्वे का काम तेजी से चल रहा है.
10 साल तक फ्लैट बेचा नहीं जा सकेगा
नगर विकास विभाग के सर्वे के अनुसार, लखनऊ की वसंतकुंज योजना अंतर्गत विनायकपुरम मलिन बस्ती में 314 परिवारों और सहारनपुर की कुष्ट आश्रम योजना अंतर्गत खलासी लाइन बस्ती में 106 परिवारों के लिए फ्लैट बनाए जाएंगे. इन फ्लैटों में पानी, बिजली, सीवरेज, सड़क और सामुदायिक केंद्र जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. योजना के तहत फ्लैट लीज पर दिए जाएंगे. 10 साल तक इन्हें बेचा नहीं जा सकेगा. 10 वर्ष बाद इन्हें फ्रीहोल्ड कर आवंटियों के नाम रजिस्ट्री कर दी जाएगी.
झुग्गियों में आग की घटना के बाद जोर पकड़ी थी मांग
पिछले हफ्ते लखनऊ और गाजियाबाद में झुग्गी बस्तियों में लगी भीषण आग ने सैकड़ों झोपड़ियां राख कर दी थीं. इसके बाद बस्तीवासियों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग जोर पकड़ने लगी थी. इसी बीच नगर विकास विभाग ने मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना को गति दी है. योजना के तहत कम से कम 60-70 परिवारों वाली बस्तियों का चयन किया जाएगा. झुग्गी-झोपड़ी और कच्चे मकानों को हटाकर वहीं बहुमंजिला इमारतें बनाई जाएंगी.
प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में सर्वे पूरा
राज्य नगरीय विकास अभिकरण की नोडल एजेंसी ने प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में सर्वे पूरा कर लिया है. लखनऊ की विनायकपुरम बस्ती लोक निर्माण विभाग की जमीन पर बसी है, इसलिए निर्माण शुरू करने से पहले जमीन नगर निगम को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं सहारनपुर की खलासी लाइन बस्ती में कोई जमीन विवाद नहीं है, इसलिए वहां काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है. राज्य नगरीय विकास अभिकरण के सर्वे में आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, मथुरा, मुरादाबाद और फिरोजाबाद में ऐसी कोई मलिन बस्ती नहीं मिली जहां इस योजना की जरूरत हो.