मेडिकल कॉलेजों तक पहुंची ISIS, बिछाया स्लीपर सेल नेटवर्क; UP-ATS की हिरासत में हारिश ने खोले ये राज
कुख्यात आतंकी संगठन ISIS ने उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में गहरी पैठ बना ली है. मुरादाबाद के डेंटल कॉलेज से गिरफ्तार छात्र हारिश ने यूपी एटीएस के सामने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसमें उसने 50 से अधिक छात्रों को इस नेटवर्क से जोड़ने की बात कबूल की है. ISIS का लक्ष्य पढ़े-लिखे युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर स्लीपर सेल बनाना है, जिसकी जांच एटीएस तेजी से कर रही है.
कुख्यात आतंकी संगठन ISIS ने देश में खासतौर पर उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पैठ बना ली है. मुरादाबाद के डेंटल कॉलेज से गिरफ्तार छात्र हारिश ने यूपी एटीएस के सामने बड़ा खुलासा किया है. एटीएस की जांच में पता चला है कि हारिश इस नेटवर्क में एक मोहरा भर है. उसकी भूमिका अलग अलग मेडिकल कॉलेजों में नेटवर्क का प्रसार करना था. इस नेटवर्क में जुड़ने के बाद हारिश ने 50 से अधिक मेडिकल छात्रों को जोड़ चुका है.
बता दें कि यूपी एटीएस की टीम ने सोमवार की रात अचानक मुरादाबाद सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के कोठीवाल डेंटल कॉलेज पहुंची थी. एटीएस ने यहां से सहारनपुर के रहने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के संदिग्ध सदस्य हारिश को हिरासत में लिया था. हारिश के हॉस्टल से एटीएस ने उसका लैपटॉप, मोबाइल फोन एवं कई अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए हैं. अब उससे पूछताछ में मिले इनपुट के अधार पर एटीएस की अलग अलग टीमों ने छापेमारी शुरू कर दी है.
ऐसे बनाते थे नेटवर्क में सदस्य
एटीएस सूत्रों के मुताबिक डेंटल कॉलेज में बीडीएस (BDS) की पढ़ाई करने वाले हारिश को नेटवर्क में कट्टरपंथी विचारधारा को फैलाने की जिम्मेदारी मिली थी. वह महज 17 साल की उम्र से ही इस नेटवर्क के लिए काम कर रहा था. उसका मुख्य काम ‘पढ़े-लिखे आतंकियों’ की फौज तैयार करना था. इसके लिए वह सोशल मीडिया पर देखता था कि कौन कट्टरपंथी या देश विरोधी पोस्ट डाल रहा है. फिर उससे संपर्क कर ग्रुप में जोड़ता था. इस प्रकार उसने मेरठ, शामली, संभल, बिजनौर और अमरोहा के मेडिकल, इंजीनियरिंग और मदरसा छात्रों को इस ग्रुप का सदस्य बनाया था.
पांच बार की कश्मीर यात्रा
एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि हारिश ने पांच बार गुप्त तरीके से कश्मीर की यात्रा की है. हालांकि हर बार उसने अपने पार्टनर को बताया कि वह अपने गांव जा रहा है. हॉस्टल में भी वह अक्सर अपने लैपटॉप में लगा रहता. इससे उसके साथियों को लगता था कि वह पढ़ाई कर रहा है. वह अपना लैपटॉप और मोबाइल किसी को छूने भी नहीं देता था. एक बार उसके रूम पार्टनर ने उसका लैपटॉप उठा लिया तो उसने एक हफ्ते तक उससे बात भी नहीं की थी.
निशाने पर थे ये छात्र
आतंकी संगठन ISIS के इस मॉड्यूल में केवल पढ़े लिखे लोगों को भर्ती किया जाना था. इसलिए हारिश को उसके हैंडलर ने साफ तौर पर तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं, डॉक्टरों और इंजीनियरों को संगठन से जोड़ने की जिम्मेदारी दी थी. इनमें खासतौर पर वो छात्र या पेशेवर लोग निशाने पर थे, जो मौजूदा सरकार या देश के खिलाफ सोशल मीडिया में पोस्ट करते थे. उसके रूम पार्टनर ने बताया कि वह हॉस्टल में अकेले रहना पसंद करता था. कैंटीन या खेल के मैदान में भी वह किसी के साथ नहीं जाता था. वह अक्सर अकेले बैठकर ऑनलाइन मीटिंग करता था.
लापता हो गए परिवार वाले
एटीएस के टीम हारिश के घर पर भी दबिश देने पहुंची, लेकिन हारिश की गिरफ्तारी के बाद से ही पूरा परिवार घर में ताला लगाकर गायब है. पड़ोसियों ने बताया कि हारिश पढ़ाई में होशियार था और पूरे गांव को उसके ऊपर नाज था. लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वह देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो सकता है. पड़ोसियों ने बताया कि वह बचपन से एकांतप्रिय था. ऐसे में सवाल उठता है कि उसे आईएसआईएस के नेटवर्क से किसने जोड़ा. एटीएस भी इसी कड़ी को सुलझाने का प्रयास कर रही है.
