सिर पर गहरी चोट, टूटी पसलियां, फटा हुआ कान का पर्दा… 15 साल पहले मुरादाबाद में DIG के साथ क्या हुआ था?

मुरादाबाद के मैनाठेर में 15 साल पहले भड़की हिंसा के दौरान तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था. इस दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर के तकरीबन हर हिस्से पर घाव था. ऐसा लग रहा था कि उनकी जान लेने की नीयत से ही हमला किया गया था.

मुरादाबाद में 15 साल पहले डीआईजी के साथ क्या हुआ था?

6 जुलाई 2011 दिन आज भी उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है. इस दिन मुरादाबाद के मैनाठेर में एक हिंसा भड़की थी. इस हिंसा के दौरान पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया था. यह हमला एक सोची-समझी साजिश थी. मुरादाबाद अदालत के समक्ष पेश हुई तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह की डिटेल्ड मेडिकल रिपोर्ट में उस दिन की बर्बरता की पूरी कहानी दर्ज है. रिपोर्ट चीख-चीखकर गवाही दे रही है कि उस भीड़ का मकसद सिर्फ विरोध करना नहीं, बल्कि एक आला अधिकारी की जान लेना था. अब इस मामले में 16 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

डॉक्टर प्रीतम बाला की गवाही और उस समय के चिकित्सकीय दस्तावेजों के मुताबिक डीआईजी को अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में लाया गया था. उनकी हालात बहुत नाजुक थीं. घायल के सिर पर प्रहार के कई गहरे निशान थे, जो किसी कुंद हथियार से पूरी ताकत के साथ किए गए थे. चेहरे से लेकर सीने तक, शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं था जहाँ जख्मों के निशान न हों. यह केवल चोटों का विवरण नहीं है, बल्कि उस उन्मादी भीड़ की क्रूरता का सबूत भी था. मेडिकल रिपोर्ट साफ बता रहा था कैसे कानून के रक्षक को घेर का मारने की कोशिश की गई.

दिमाग को भी क्षति पहुंचाने की कोशिश की गई थी

15 साल बाद भी इस रिपोर्ट में दर्ज जानकारियां उतना ही विचलित करने वाली हैं जितनी उन दिनों थीं. जब सिस्टम के एक मजबूत स्तंभ को ढहाने की कोशिश की गई थी, पूरी घटना इतिहास के काले पन्नों में दर्ज हो गई है. इसपर न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. चिकित्सीय परीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं. मुरादाबाद के तत्कालीन डीआईजी के सिर पर मौजूद ‘लेसरेटेड’ घाव बताते हैं कि हमलावरों ने उनके मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंचाने का टार्गेट रखा था.

शरीर के तकरीबन हर हिस्से पर थीं गंभीर चोटें

सबसे घातक प्रहार उनके कान पर हुआ, जिससे उनके दाहिने कान का पर्दा फट गया. इसे चिकित्सा विज्ञान में ‘ग्रीवियस इंजरी’ यानी अति गंभीर श्रेणी में रखा जाता है. चेहरे की सूजन और आंखों के ऊपर के गहरे घाव यह साबित करते हैं कि तत्कालीन डीआईजी पर आमने-सामने से घातक हमला हुआ था. मुरादाबाद में चिकित्सकों के द्वारा किए गए उपचार के आधार पर तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट यह बात स्पष्ट करती है यह हमला सीधा जान लेने के लिए किया गया था.अशोक कुमार सिंह की दाहिनी तरफ की छठी और सातवीं पसलियां पूरी तरह टूट चुकी थीं, जिससे उनके फेफड़ों पर भी संकट मंडरा रहा थाय

घायल डीआईजी को 3 दिन में होश आया था

बाएं कंधे की स्कैपुला हड्डी और हाथों की उंगलियों में हुए फ्रैक्चर इस बात का प्रमाण हैं कि IPS अशोक कुमार सिंह ने खुद को बचाने का भरपूर प्रयास किया था. लेकिन भीड़ उनपर लगातार हमले करती रही. उनके पेट में उठने वाले असहनीय दर्द के कारण डॉक्टरों को तत्काल आंतरिक अंगों के अल्ट्रासाउंड और न्यूरो-आर्थो विशेषज्ञों की टीम तैनात करनी पड़ी थी. घायल डीआईजी को 3 दिन में होश आया था . सप्लीमेंट्री रिपोर्ट ने अदालत में इस बात को पुख्ता कर दिया कि ये चोटें सामान्य संघर्ष का परिणाम नहीं थीं, बल्कि जानलेवा इरादे से किए गए हमले का सबूत थीं.

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