मुरादाबाद में बंदरों का आतंक: DM ने बनाई STF, हिंसक बंदरों को जंगल में छोड़ा जाएगा

मुरादाबाद के मोरा की मिलक इलाके में बंदरों के लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत है. पिछले 24 घंटे में बंदरों ने तीन लोगों को घायल कर दिया. 53 वर्षीय आबिद पर सोते समय बंदर ने हमला किया, जबकि होशियार सिंह और 81 वर्षीय करण सिंह भी घायल हुए. जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने समस्या के समाधान के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाने की बात कही है. प्रशासन हिंसक बंदरों को चिह्नित कर पकड़ने और आबादी से दूर वन क्षेत्रों में भेजने की तैयारी कर रहा है.

मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की बात कही

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बंदरों का आतंक अब लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है. मोरा की मिलक इलाके में पिछले 24 घंटे के भीतर बंदरों के हमले में तीन लोगों के घायल होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. हालात यह हैं कि लोग अपने घरों के आंगन में सोने और खुले में बैठकर खाना खाने तक से डर रहे हैं. बंदरों के लगातार आक्रामक व्यवहार को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने विशेष रणनीति तैयार करने का फैसला किया है.

मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की बात कही है. प्रशासन की योजना हिंसक और आक्रामक बंदरों को चिह्नित कर उन्हें पकड़ने और आबादी वाले इलाकों से दूर वन क्षेत्रों में भेजने की है. डीएम के मुताबिक, बंदरों को ऐसे स्थानों पर छोड़े जाने की योजना है जहां उनके भोजन की उचित व्यवस्था हो सके, ताकि वे दोबारा रिहायशी इलाकों की ओर न आएं.

मोरा की मिलक में लगातार हो रहे हमले

मोरा की मिलक में बंदरों के हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों के मुताबिक बंदर अब केवल घरों की छतों या पेड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आबादी वाले इलाकों में घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं. बीते 24 घंटे में तीन लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. इन घटनाओं में बंदरों ने घर के आंगन में सो रहे लोगों और घर के अंदर खाना खा रहे बुजुर्ग को भी निशाना बनाया. हमलों के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है. परिवारों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है, जबकि बुजुर्ग भी घर से बाहर निकलने और छत पर जाने से बच रहे हैं.

सोते समय 53 वर्षीय आबिद पर हमला

हमले की पहली घटना देर रात चामुंडा मंदिर के पास की बताई जा रही है. यहां 53 वर्षीय आबिद अपने घर के आंगन में सो रहे थे. इसी दौरान अचानक एक बंदर उनके ऊपर आ बैठा और उनके गले पर हमला कर दिया. परिजनों ने बंदर को हटाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार वह करीब 10 मिनट तक आबिद से लिपटा रहा. हमले में आबिद की उंगलियों पर भी गंभीर चोटें आईं. परिजनों ने किसी तरह बंदर को वहां से हटाया.

होशियार सिंह पर भी सोते समय हमला

इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति होशियार सिंह पर भी बंदर ने हमला कर दिया. बताया गया कि वह भी अपने घर के आंगन में सो रहे थे. बंदर ने उन पर हमला कर उन्हें काट लिया. लगातार दो घटनाओं के बाद इलाके में लोगों ने रात के समय खुले आंगन में सोना लगभग बंद कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के डर से अब परिवार के लोग रात में भी सतर्क रहते हैं.

खाना खाते समय 81 वर्षीय बुजुर्ग पर हमला

शुक्रवार दोपहर को बंदर ने 81 वर्षीय करण सिंह को भी अपना निशाना बनाया. बताया गया कि करण सिंह घर में खाना खा रहे थे. इसी दौरान पीछे से आए बंदर ने उनकी कोहनी पर हमला कर दिया. हमले में उन्हें गहरा जख्म हुआ और वह घायल हो गए. इस घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि अब बंदरों के हमले सिर्फ खुले स्थानों तक सीमित नहीं रह गए हैं. घर के अंदर मौजूद लोगों पर भी हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं.

कांठ में भी बंदर और आवारा कुत्तों से परेशानी

बंदरों की समस्या सिर्फ मोरा की मिलक तक सीमित नहीं बताई जा रही है. जिले के कांठ क्षेत्र में भी बंदरों और आवारा कुत्तों के हमलों से लोग परेशान हैं. राहगीरों और स्कूली बच्चों की आवाजाही पर भी इसका असर पड़ रहा है. कई लोग बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से बच रहे हैं. कांठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी बड़ी संख्या में लोग जानवरों के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे. एक ही दिन में 14 नए घायल अस्पताल पहुंचे.

डीएम ने कहा- लगातार मिल रही हैं हमले की शिकायतें

मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि जिले में बंदरों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इन घटनाओं में कई नागरिक घायल हुए हैं. डीएम के मुताबिक पीड़ितों को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन की ओर से विशेष टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी की जा रही है.

हिंसक बंदरों को चिह्नित कर पकड़ने की तैयारी

प्रशासन की प्रस्तावित रणनीति में सबसे पहले उन बंदरों की पहचान करना शामिल है जो लोगों पर लगातार हमले कर रहे हैं. ऐसे बंदरों को चिह्नित करने के बाद उन्हें पकड़कर आबादी वाले क्षेत्रों से दूर वन क्षेत्रों में छोड़े जाने की योजना है. प्रशासन का मानना है कि यदि इन बंदरों को आबादी से दूर ऐसे स्थानों पर भेजा जाए जहां उनके भोजन की व्यवस्था उपलब्ध हो, तो उनके दोबारा रिहायशी इलाकों में आने की संभावना कम की जा सकती है.

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