बरेली से लेकर हल्द्वानी तक बनने जा रहे एक्सप्रेस-वे से अब मुरादाबाद भी जुड़ेगा, सीमांकन हुआ शुरू

बरेली से लेकर हल्द्वानी तक बनने जा रहे एक्सप्रेस-वे से अब मुरादाबाद भी जुड़ेगा. ऐसे में मुरादाबाद के पीतल व्यापारियों का कहना है कि उत्तराखंड से कनेक्टिविटी बढ़ने से वहां के श्रद्धालुओं का आना-जाना बढ़ेगा. इसका सीधा फायदा मुरादाबाद के पीतल उद्योग के साथ लकड़ी और एल्यूमीनियम के व्यापार को भी मिलेगा.

एक्सप्रेस वे ( सांकेतिक तस्वीर)

मुरादाबाद जनपद ने पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से अपनी पहचान बना रखी है. मुरादाबाद का पीतल दुनिया में ही नहीं, बल्कि देशभर में सप्लाई किया जाता है. पीतल उद्योग को बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है. वहीं, उत्तराखंड ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाता है. यहां बड़े धार्मिक स्थल हैं और श्रद्धालु लगातार दर्शन के लिए वहां जाते हैं. ऐसे में उत्तराखंड को जोड़ने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) के द्वारा बरेली से हल्द्वानी के बीच लगभग 100 किलोमीटर लंबा ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ बनाया जा रहा है.

इस प्रोजेक्ट के लिए सीमांकन का काम शुरू हो गया है, इस एक्सप्रेसवे को बरेली-मुरादाबाद हाईवे से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सफर के समय में बड़ी बचत होने वाली है. माना जा रहा है कि व्यापारियों के लिए कॉरिडोर के रूप में उपयोगी साबित होने वाला है. मुरादाबाद के पीतल व्यापारियों का कहना है कि उत्तराखंड से कनेक्टिविटी बढ़ने से वहां के श्रद्धालुओं का आना-जाना बढ़ेगा. इसका सीधा फायदा मुरादाबाद के पीतल उद्योग के साथ लकड़ी और एल्यूमीनियम के व्यापार को भी मिलेगा.

यूपी के प्रमुख शहरों से जुड़ेगा उत्तराखंड का कुमाऊं इलाका

NHAI की योजना के हिसाब से इस नए एक्सप्रेसवे को मुरादाबाद-बरेली हाईवे से जोड़ा जाएगा, इस रणनीतिक का लाभ यह होगा कि दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाले वाहन सीधे इस एक्सप्रेसवे पर चढ़कर, बिना बरेली शहर में फंसे उत्तराखंड की ओर जा सकेंगे है. यह इंटर-लिंकिंग उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को उत्तराखंड के कुमाऊं इलाके से जोड़ने में ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाली है.

पर्यटन उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेसवे के बनने से नैनीताल, भीमताल, रानीखेत और अल्मोड़ा जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की यात्रा सरल हो जाएगी, इससे उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को भी भारी लाभ होगा, दूसरी ओर, मुरादाबाद के पीतल उद्योग, रामपुर के लकड़ी उद्योग, ज़री और कृषि उत्पादों को पहाड़ों तक पहुँचाने में कम समय लगेगा, मालवाहक वाहनों के लिए यह रास्ता किसी वरदान से कम नहीं है.

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