पानी बहुत ठंडा है… नाले में गिरी कार, इंजीनियर ने पापा को किया आखिरी फोन कॉल; ठंड से हुई मौत

ग्रेटर नोएडा में घने कोहरे के कारण एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार नाले में गिर गई, जिससे उसकी ठंड से मौत हो गई. इंजीनियर ने अपने पिता को आखिरी फोन कर बताया कि वह ठंडे पानी में फंसा है. सड़क पर रिफ्लेक्टर न होना और राहगीरों व प्राधिकरण की लापरवाही इस दुखद घटना का मुख्य कारण मानी जा रही है.

नाले में गिरी इंजीनियर की कार, मौत Image Credit:

राष्ट्रीय राजधानी से सटे ग्रेटर नोएडा में शनिवार को छाए घने कोहरे ने एक साफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली. सड़क पर घने कोहरे और रिफ्लेक्टर ना होने की वजह से इंजीनियर की गाड़ी लुढ़कते हुए नाले में चली गई. इस दौरान काफी कोशिशें कर इंजीनियर जैसे तैसे गाड़ी से तो बाहर आ गया, लेकिन नाले से निकल नहीं पाया. ऐसे में उसने आखिरी फोन कॉल अपने पिता को की. कहा कि बहुत ठंड है और निकल नहीं पा रहा. फिर थोड़ी देर तक उस ठंडे पानी की वजह उसकी मौत हो गई.

मामला ग्रेटर नोएड में नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के सेक्टर 150 का है. इंजीनियर के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि उनके बेटे ने जब फोन किया तो वह बिलकुल निराश हो चुका था. उसने कहा था कि वह पानी में फंसा है और बहुत ठंड है. उसने जल्दी आने को कहा था, लेकिन उनके पहुंचने में देरी हो गई और उनके बेटे ने उस ठंडे पानी में तड़प कर दम तोड़ दिया. उनका बेटा नाले में गिरने के बाद खूब चिल्लाया, लोगों से मदद मांगी, लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया.

राहगीरों ने नहीं की मदद

उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ लोग थे भी, लेकिन लोग मदद करने के बजाय पुलिस को फोन करते रहे. वहीं जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती, काफी देर हो चुकी थी. फिलहाल पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पिता राजकुमार मेहता के मुताबिक यदि राहगीरों ने उनके बेटे की मदद की होती तो शायद उसकी जान बच जाती. कहा कि उनका बेटा सबको हंसाने वाला था, लेकिन सबको रोता हुआ छोड़कर चला गया.

इंजीनियर को भारी पड़ी सरकारी लापरवाही

इंजीनियर युवराज की मौत की खबर सुनकर उसकी सोसाइटी के लोग मौके पर पहुंचे. सोसायटी वासियों के मुताबिक सड़क पर कहीं रिफ्लेक्टर नहीं लगा है. ऐसे हालात में धुंध में सड़क दिखाई नहीं दी और युवराज की गाड़ी नाले में पलट गई. इसके बाद सोसायटी के लोगों ने प्राधिकरण के खिलाफ जमकर हंगामा किया. हालांकि मौके पर पुलिस ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया. इसके बाद प्राधिकरण ने उस खाली पड़े प्लॉट में मलबा डालकर भरवा दिया है.