नोएडा इंजीनियर की मौत मामले में NGT का एक्शन, सिस्टम की खामियां उजागर; दो और बिल्डर गिरफ्तार

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की नोएडा में दर्दनाक मौत के बाद NGT ने कड़ा रुख अपनाया है. इस हादसे ने जल प्रबंधन और पर्यावरण नियमों में बड़ी लापरवाही उजागर की है. पुलिस ने दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने मामले में तीन सदस्यीय SIT जांच गठित की थी.

नोएडा इंजीनियर की मौत मामले में NGT का एक्शन Image Credit:

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले में कार्रवाई तेज है. इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अब कड़ा रूख अपनाया है. NGT ने कहा कि यह हादसा न केवल एक दुर्घटना है बल्कि इसमें पर्यावरण नियमों और जल प्रबंधन में बड़ी लापरवाही की गई है. साथ ही प्राधिकरण, जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से जवाब तलब किया.

NGT के संज्ञान लेने के बाद अब पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण हरकत में आ गया है. नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने दो और बिल्डर रवि बंसल और सचिन करनावल को गिरफ्तार किया है. एक दिन पहले ही पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ जल संरक्षण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामलों में मुकदमा दर्ज किया था. जबकि एक को जेल भेजा जा चुका है.

जल भराव को खत्म करने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए?

एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से कई सवाल भी पूछे हैं. NGT का सवाल है कि कई सालों से भरे जल भराव को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए हैं? वहीं, इस मामले में अब नोएडा की जिलाधिकारी रुपा मैडम से भी घटनास्थल पर देरी से पहुंचने और जिला प्रशासन गेंदे की को लेकर भी जवाब तलब किया गया है.

दरअसल, 16 जनवरी की रात को ऑफिस से घर लौटते वक्त सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक बिल्डर की निर्माधीन साइट में बने करीब 70 फिट गहरे गड्ढे में जा गिरी थी. इस मामले में मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने पुलिस एनडीआरएफ फायर ब्रिगेड और तमाम वहां पर मौजूद लोगों पर लापरवाही के आरोप लगाए थे.

CM ने मामले में SIT गठित की, 5 दिन में मांगा रिपोर्ट

उनका कहना था कि बेटा गाड़ी की छत पर खड़ा होकर मोबाइल से टॉर्च जलाकर चीखता चिल्लाता रह गया कि मुझे बचाओ और मुझे ठंडे पानी से निकाले. लेकिन सिस्टम की नाकामी के चलते मेरे बेटे ने अपनी जान गवा दी. घटना के अगले दिन मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया और तीन सदस्य एसआईटी टीम घोषित की. साथ ही प्राधिकरण के CEO को हटा दिया.

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में एक बिल्डर को गिरफ्तार भी कर लिया था. मुख्यमंत्री ने एसआईटी टीम से 5 दिन में रिपोर्ट तलब करने के लिए कहा है यानी कि अगले दो दिन बाद एसआईटी की टीम अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को पेश करेगी और जिसमें यह पता चलेगा कि आखिर इसमें लापरवाही और सिस्टम कहां फेल हो गया.