75 फीसदी काम पूरा, जुलाई तक यमुना से जुड़ जाएगा इस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे; जानें क्या होगा फायदा

यमुना और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का इंटरचेंज जुलाई तक खुलने वाला है, जिसका 75% काम पूरा हो चुका है. यह इंटरचेंज नोएडा, ग्रेटर नोएडा, पश्चिमी यूपी और हरियाणा के यात्रियों को बड़ी राहत देगा. इससे 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी और जाम से मुक्ति मिलेगी. जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच भी आसान हो जाएगी. यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लिए एक नई कनेक्टिविटी क्रांति साबित होगा.

यमुना एक्सरप्रेस वे Image Credit:

नोएडा आगरा यमुना एक्सप्रेसवे और इस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेवे को जोड़ने की कवायद लगभग पूरी हो गई है. उम्मीद है कि जून के आखिर या जुलाई के पहले हफ्ते तक इन दोनों एक्सप्रेसवे का इंटरचेंज शुरू हो जाएगा. इससे ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों यात्रियों के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे से हरियाणा की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो जाएगी. इस योजना पर काम करीब 7 साल पहले 2019 में शुरू किया गया था.

अधिकारियों के मुताबिक इन दोनों एक्सप्रेसवे के बीच सीधी कनेक्टिविटी होने से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी कम हो जाएगी. इस परियोजना के शुरू होने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यात्रियों को जाम और लंबी दूरी से राहत मिलेगी. खास बात यह है कि इस इंटरचेंज से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर तक पहुंचना भी पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा. यह इंटरचेंज यमुना एक्सप्रेसवे के 10 किलोमीटर पॉइंट पर जगनपुर अफजलपुर गांव के पास बनाया गया है.

कोविड में अटकी परियोजना

अधिकारियों के मुताबिक इस इंटरचेंज को बनाने के पीछे उद्देश्य था कि यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो. इससे यात्रियों को बार-बार शहर की भीड़ में परी चौक तक जाने की जरूरत ना पड़े. पहले यह प्रोजेक्ट भूमि विवाद और किसानों के विरोध की वजह से अटकी. फिर कोविड महामारी और बढ़ती लागत के चलते काम ठप हो गया. शुरुआती चरण में दिल्ली के कंपनी को इसका ठेका दिया गया था, लेकिन बाद में इसकी जिम्मेदारी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई.अब इस इंटरचेंज कब लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.

432 करोड़ की लागत

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 432 करोड रुपए खर्च किए जा रहे हैं. लगभग 48 हेक्टेयर जमीन पर पहले इस इंटरचेंज में कुल आठ लूप बनाए गए हैं. जिनकी कुल लंबाई 11 किलोमीटर बताई जा रही है. चार लूप उत्तर दिशा और चार लूप दक्षिण दिशा की आवाजाही को सुगम बनाएंगे. अधिकारियों का कहना है कि दोनों एक्सप्रेसवे से लूप जोड़ दिए गए हैं और अब अंतिम चरण में ब्लैक लेयर में अन्य तकनीकी कार्य किया जा रहे हैं. इसके पूरा होते ही यह इंटरचेंज पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाएगा. फिलहाल ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे से यमुना एक्सप्रेसवे पर जाने के लिए चालकों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. सिरसा या परी चौक होकर निकलने में अतिरिक्त 20 किलोमीटर तक दूरी बढ़ जाती है. इससे समय ईंधन और ट्रैफिक तीनों पर दबाव पड़ता है.

इन क्षेत्रों को होगा सीधा फायदा

इस परियोजना से केवल हाईवे कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के विकसित हो रहे सेक्टरों को भी इसे सीधा फायदा होगा. 60 मीटर चौड़ी सड़क को इंटरचेंज से जोड़ा गया है. जिससे आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र की पहुंच बेहतर होगी. यह इंटरचेंज शुरू होने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी. यमुना और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे का यह संगम सिर्फ एक इंटरचेंज नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लिए नई कनेक्टिविटी क्रांति माना जा रहा है. जिससे दूरी समय और जाम तीनों की बचत होगी और साथ ही जेवर में बना रहे नोएडा इंटरनेशनल तक पहुंचाने की रहा और आसान हो जाएगी.

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